निषादराज के नाम पर बनेगी धर्मशाला, विधायक ने किया पुनर्वास का वादा
जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने केवट-मलाह समाज के लिए धर्मशाला व सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और रोजगार का संकल्प लिया।

द क्लिफ न्यूज़ | जौरा | 31 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के जौरा में, केवट-मलाह समुदाय की ज्वलंत समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनसंवाद एवं सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया। पहाड़गढ़ विकासखंड के ग्राम होराबरा में आयोजित इस बैठक में समुदाय के सुरक्षित पुनर्वास, रोजगार सृजन और सर्वांगीण विकास के लिए विशेष घोषणाएं की गईं। इस अवसर पर गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता राजगोपाल पी.वी. (राजू भाई) मुख्य अतिथि रहे, जबकि जौरा के विधायक पंकज उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बैठक से पूर्व, महात्मा गांधी सेवा आश्रम ने समुदाय के बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की। आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने बताया कि बरसात और बाढ़ से पीड़ित गरीब एवं जरूरतमंद केवट-मलाह परिवारों को हेवी-ड्यूटी वाटरप्रूफ तिरपाल शीटें वितरित की गईं, ताकि वे वर्षा के दौरान अपने घरों को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने आश्वस्त किया कि समुदाय का कोई भी गरीब परिवार राहत सामग्री से वंचित नहीं रहेगा और शीघ्र ही और भी सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन से भी इस मानवीय अभियान में सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।
समुदाय की प्रमुख समस्याएं और मांगें
केवट-मलाह विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में समुदाय के सदस्यों ने विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इनमें बाढ़ के समय सुरक्षित आवास की व्यवस्था, स्थायी रोजगार, पलायन रोकना, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली की उपलब्धता, गरीबी और बेरोजगारी प्रमुख थे। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन द्वारा उपेक्षा का आरोप भी लगाया और मांग की कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भूमि आवंटित कर स्थायी आवासों के साथ नए गांव बसाए जाएं।
कार्यक्रम का संचालन केवट-मलाह विकास समिति के संयोजक लखन सिकरवार और एकता परिषद के जिला संयोजक उदयभान सिंह परिहार ने संयुक्त रूप से किया। बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी लक्ष्मण सिंह केवट, बनवारी केवट, रमेश केवट, महिला नेत्री कुसुमा केवट सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
गांधीवादी कार्यकर्ता का आह्वान: 'हाथ जोड़ने के बजाय संघर्ष करो'
विख्यात गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता राजगोपाल पी.वी. (राजू भाई) ने अपने प्रेरक संबोधन में समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर व अधिकार-संपन्न बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सच्ची गांधीवादी सेवा है। राजू भाई ने आह्वान किया कि अब समय आ गया है कि वंचित समाज केवल हाथ जोड़ने के बजाय अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करे। उन्होंने ग्राम सभा को लोकतंत्र की सबसे शक्तिशाली संस्था बताते हुए कहा कि यदि समुदाय संगठित होकर ग्राम सभा को मजबूत बनाए, तो उसके प्रस्तावों को लागू करना सभी के लिए बाध्यकारी होगा। उन्होंने 'पैर छूना छोड़ो, मुट्ठी बांधो और अपने हक़-अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करो' का नारा देते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय समाज का है।
विधायक की बड़ी घोषणाएं: धर्मशाला, पुनर्वास और आरक्षण
जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने समुदाय के लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने समुदाय की एक प्रमुख मांग, केवट-मलाह समाज को अनुसूचित जाति आरक्षण में शामिल कराने को लेकर विधानसभा में दो बार प्रस्ताव रखने की जानकारी दी और भविष्य में भी इस संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।
राजगोपाल पी.वी. (राजू भाई) की उपस्थिति में विधायक उपाध्याय ने यह संकल्प लिया कि वे बाढ़ प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास, रोजगार की व्यवस्था और पलायन को रोकने के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर निरंतर संघर्ष करेंगे। उन्होंने भगवान निषादराज के नाम पर एक धर्मशाला एवं सामुदायिक भवन के निर्माण हेतु विधायक निधि से विशेष राशि देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर शीघ्र हैंडपंप स्थापित कराने, सरकारी भूमि पर वर्षों से काबिज परिवारों को मालिकाना हक दिलाने, पूर्व में दिए गए पट्टों पर कब्जा दिलाने तथा आवास, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
'आज का गांधी' के साथ मिलकर जनसंघर्ष की रणनीति
विधायक पंकज उपाध्याय ने राजगोपाल पी.वी. (राजू भाई) को 'आज का गांधी' की उपाधि देते हुए केवट-मलाह समाज की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज को न्याय दिलाने के लिए वे राजू भाई के साथ मिलकर एक विशेष जनसंघर्ष की रणनीति तैयार करेंगे और प्रत्येक लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
बैठक के अंत में, केवट-मलाह समुदाय के सदस्यों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों, सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य के लिए संगठित संघर्ष का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और अधिकार आधारित जनजागरण का एक प्रभावशाली उदाहरण बनकर सामने आया।
