निर्यात खुलने और वैश्विक चिंताओं के बीच गेहूं की कीमतों में उछाल
भारतीय मंडियों में गेहूं की कीमतों में पिछले महीने ₹200 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। निर्यात पर प्रतिबंध हटने से कीमतों में उछाल...

गेहूं की कीमतों में ₹200 प्रति क्विंटल तक का उछाल
पिछले एक महीने में देश भर की विभिन्न मंडियों में गेहूं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। कई जगहों पर दाम ₹2850 से ₹3000 प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गए हैं।
निर्यात खुलने से बढ़ी मांग
गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात पर से सरकारी प्रतिबंध हटने के फैसले ने मांग को बढ़ावा दिया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारतीय गेहूं को खोले जाने का सीधा असर घरेलू बाजार की गतिशीलता पर पड़ा है।
वैश्विक दबाव का असर
अंतरराष्ट्रीय कारक भी गेहूं की बढ़ती कीमतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। काला सागर क्षेत्र में आपूर्ति में व्यवधान और अमेरिकी व यूरोपीय बाजारों में फसल की पैदावार को लेकर चिंताएं वैश्विक स्तर पर कीमतों को ऊंचा बनाए हुए हैं।
मौसम की चिंता और भविष्य की पैदावार
अल नीनो का प्रभाव और इस वर्ष मानसून की बारिश में कमी जैसे मौजूदा मौसम के मिजाज रबी की फसल और कुल उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ा रहे हैं। भविष्य की पैदावार को लेकर अनिश्चितता मौजूदा बाजार की धारणा और मूल्य वृद्धि में योगदान दे रही है।
बाजार में अटकलों का दौर
बाजार में सटोरियों की गतिविधियां और अफवाहें अनिश्चितता का माहौल बना रही हैं। व्यापारी और किसान इस दुविधा में हैं कि कीमतें ₹3000 प्रति क्विंटल का आंकड़ा पार करेंगी या नीचे आएंगी।
सरकार का आश्वासन: पर्याप्त बफर स्टॉक
कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में गेहूं का बफर स्टॉक है, जो निर्धारित मानकों से दोगुना से अधिक बताया जा रहा है। यह स्टॉक संभावित आपूर्ति की कमी के खिलाफ एक मजबूत ढाल प्रदान करता है।
अत्यधिक मूल्य वृद्धि या उपलब्धता में कमी की स्थिति में, सरकार के पास हस्तक्षेप करने का तंत्र है। ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के माध्यम से, अधिकारी कीमतों को विनियमित करने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बाजार में गेहूं जारी कर सकते हैं, जिससे यह एक प्रमुख स्थिरीकरण शक्ति के रूप में कार्य करता है।
