निर्यात अब डॉलर नहीं, रुपये में भी होगा: DGFT के नए नियम से निर्यातकों को बड़ी राहत
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी खरीदारों से भारतीय रुपये में भुगतान लेने का रास्ता साफ कर दिया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 अगस्त 2026
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेश व्यापार नीति में संशोधन करते हुए भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी खरीदारों को भारतीय रुपये में बिल जारी करने और इस मुद्रा में भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया को और सुगम बना दिया है। यह नया प्रावधान विदेशी व्यापार में अमेरिकी डॉलर या अन्य विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता को कम करने का लक्ष्य रखता है।
नए नियमों के तहत, भारतीय निर्यातक अब निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए विदेशी खरीदारों के साथ रुपये में अनुबंध कर सकेंगे, चालान जारी कर सकेंगे और अधिकृत बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भुगतान प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली का एक अहम पहलू यह है कि रुपये में प्राप्त निर्यात भुगतान को विदेश व्यापार नीति (FTP) के तहत उपलब्ध लाभों और निर्यात दायित्वों की पूर्ति के लिए भी पूरी तरह मान्यता दी जाएगी।
रुपये में निर्यात की नई रूपरेखा
यह नई व्यवस्था नेपाल और भूटान को छोड़कर अन्य सभी देशों के साथ होने वाले व्यापार पर लागू होगी। इसका अर्थ है कि यदि कोई विदेशी खरीदार भारतीय रुपये में भुगतान करने के लिए सहमत है, तो निर्यातक भारतीय मुद्रा में अनुबंध और चालान तैयार करने के लिए स्वतंत्र होगा। यह उन देशों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है जहाँ डॉलर की उपलब्धता सीमित है या विदेशी मुद्रा भुगतान में बार-बार बाधाएं आती हैं।
निर्यातकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि रुपये में प्राप्त होने वाला भुगतान अधिकृत बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ही हो। इस अनिवार्यता का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी निर्यात प्राप्तियां नियमानुसार बैंकिंग प्रणाली में दर्ज हों। रुपये में भुगतान को केवल इसलिए कमतर नहीं आंका जाएगा कि यह विदेशी मुद्रा में नहीं हुआ है।
निर्यातकों को मिलेंगे सरकारी योजनाओं के लाभ
नए प्रावधानों का एक प्रमुख लाभ यह है कि निर्यातक रुपये में प्राप्त राशि पर भी विदेश व्यापार नीति (FTP) के तहत मिलने वाले लाभों के लिए पात्र माने जाएंगे। इसका मतलब है कि यदि कोई निर्यातक भारतीय रुपये में भुगतान प्राप्त करता है, तो उसे केवल इसी कारण से नीतिगत लाभों से वंचित नहीं किया जाएगा। यह नियम उन निर्यातकों के लिए नियामक प्रक्रिया को सरल और अधिक स्पष्ट बना सकता है जो रुपये में व्यापार करते हैं।
इसके अतिरिक्त, विदेश व्यापार नीति के तहत निर्यात दायित्वों को पूरा करने वाले निर्यातकों के लिए भी रुपये में प्राप्त भुगतान को मान्यता दी जाएगी। निर्धारित नियमों के अनुसार, रुपये में किया गया पात्र निर्यात भुगतान, विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान के समान ही निर्यात दायित्व की गणना में शामिल किया जा सकेगा। यह उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान करेगा जो सरकारी व्यापार योजनाओं के तहत अपने निर्यात दायित्वों को पूरा करती हैं।
डॉलर पर निर्भरता घटाने का सरकारी प्रयास
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की सर्वव्यापी भूमिका को देखते हुए, यह कदम भारत की दीर्घकालिक मुद्रा और व्यापार रणनीति के अनुरूप है। भारतीय आयातक और निर्यातक लंबे समय से डॉलर-आधारित भुगतान प्रणाली पर अत्यधिक निर्भर रहे हैं। वैश्विक व्यापार में विभिन्न देशों की मुद्राओं में सीधे कारोबार को बढ़ावा देने के प्रयास तेज हो रहे हैं, और रुपये में व्यापार को प्रोत्साहन देने वाला यह निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यदि कोई विदेशी खरीदार सीधे भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करता है, तो भारतीय निर्यातक को पहले विदेशी मुद्रा प्राप्त करने और फिर उसे रुपये में बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे मुद्रा परिवर्तन से जुड़ी लागतों में कमी आएगी, जो निर्यातक के लिए प्रत्यक्ष लाभ का कारण बन सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत बैंकिंग व्यवस्था, अनुबंध की शर्तों और लेनदेन की प्रकृति पर निर्भर करेगी।
विनिमय दर जोखिम और डॉलर की कमी वाले देशों के लिए राहत
निर्यात कारोबार में विदेशी मुद्रा की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक होता है। रुपये में सीधे अनुबंध और भुगतान होने पर, भारतीय निर्यातकों के लिए विनिमय दर में होने वाले अनपेक्षित बदलावों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह उन कारोबारियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिनका व्यापार ऐसे बाजारों में नियमित रूप से होता है जहाँ रुपये में भुगतान को स्वीकार करने की क्षमता मौजूद है।
दुनिया के कुछ देशों में अमेरिकी डॉलर की उपलब्धता या अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों तक पहुंच एक चुनौती हो सकती है। ऐसे बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए भुगतान संबंधी जोखिम बढ़ जाता है। रुपये में सीधे भुगतान की सुविधा ऐसे देशों के साथ व्यापार को सुगम बना सकती है, जिससे खरीदार को डॉलर की व्यवस्था करने की आवश्यकता कम हो जाएगी और निर्यातक को भुगतान प्राप्त करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे व्यापारिक संबंध विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।
छोटे निर्यातकों को भी होगा लाभ
यह सुविधा केवल बड़ी निर्यात कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। छोटी कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन, बैंकिंग शुल्क और विनिमय दर जोखिमों का प्रबंधन अक्सर एक बड़ी चुनौती होती है। यदि विदेशी खरीदार रुपये में भुगतान करने के लिए तैयार है, तो ऐसे निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार करना अपेक्षाकृत सरल हो जाएगा। हालांकि, इसके लिए विदेशी खरीदार की सहमति और संबंधित बैंकिंग व्यवस्था की उपलब्धता आवश्यक होगी।
भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण को गति
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के उपयोग को बढ़ावा देने से भारतीय मुद्रा की वैश्विक स्वीकार्यता को बढ़ाने में मदद मिलेगी। यदि अधिक देश और विदेशी कंपनियां भारतीय निर्यातकों के साथ रुपये में व्यापार करती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय कारोबार में रुपये का इस्तेमाल बढ़ेगा। यह भविष्य में भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीय उपयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। यह बदलाव भारत की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसमें सीमा पार व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने और विदेशी मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
भुगतान प्रणाली में बैंकिंग की महत्वपूर्ण भूमिका
हालांकि रुपये में निर्यात भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है, फिर भी बैंकिंग प्रणाली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहेगी। निर्यातकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भुगतान अधिकृत बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ही प्राप्त हो और सभी आवश्यक दस्तावेज व नियामक औपचारिकताएं पूरी की जाएं। इससे लेनदेन की वैधता, निर्यात मूल्य और भुगतान की वास्तविकता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
संक्षेप में, DGFT का यह नया प्रावधान भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भुगतान के लिए एक अतिरिक्त और आकर्षक विकल्प प्रदान करता है। भले ही यह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त न करे, लेकिन जिन बाजारों में विदेशी खरीदार रुपये में भुगतान करने के इच्छुक हैं, वहां भारतीय कारोबारियों को अधिक सुविधा मिलेगी। कम मुद्रा परिवर्तन लागत, घटता विनिमय दर जोखिम और सुगम भुगतान व्यवस्था के कारण रुपये में कारोबार निर्यातकों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बन सकता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये की स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
