निजी बसों के किराए में वृद्धि, छात्रों ने मांगा नि:शुल्क बस पास
गुना में छात्र संगठन डीएसओ ने निजी बसों के बढ़ते किराए और कॉलेज में अतिरिक्त शुल्क वसूली के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 13 अक्टूबर 2026
गुना में निजी बसों के किराए में हुई बढ़ोतरी के बाद छात्र-नौजवानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंगलवार को छात्र संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (डीएसओ) की जिला काउंसिल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधीश को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें छात्रों के लिए नि:शुल्क बस पास की सुविधा उपलब्ध कराने और शैक्षणिक संस्थानों में अतिरिक्त शुल्क वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई है।
संगठन के अध्यक्ष शुभम राव ने स्पष्ट किया कि निजी बस संचालकों को प्रति किलोमीटर दो रुपए तक किराया बढ़ाने की अनुमति मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी के कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। डीएसओ ने अन्य राज्यों की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी सभी छात्रों को नि:शुल्क बस पास जारी करने की पुरजोर मांग की है।
शैक्षणिक अव्यवस्थाओं पर चिंता
डीएसओ ने सौंपे गए ज्ञापन में शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त अव्यवस्थाओं पर भी गहरी चिंता जताई है। संगठन ने सांदीपनि स्कूलों के नाम पर ग्रामीण स्कूलों को बंद किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि इस निर्णय के कारण छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूरदराज के क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी आने-जाने की परेशानी और खर्च बढ़ गया है।
कॉलेज में अतिरिक्त शुल्क वसूली का आरोप
इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में गुना के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में छात्रों से की जा रही अतिरिक्त वसूली का भी उल्लेख किया गया है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा लगभग डेढ़ हजार विद्यार्थियों से वार्षिक बस शुल्क के नाम पर 365 रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जबकि छात्रों को धरातल पर किसी भी प्रकार की बस सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
आंदोलन की चेतावनी
डीएसओ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन गंभीर समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो संगठन बड़े स्तर पर उग्र आंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग में आर्थिक बाधाएं उत्पन्न न हों। अब इस मामले में प्रशासन के अगले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
