मछली पकड़ने के अधिकारों में बाधा की शिकायत पर NHRC सख्त, राज्य सरकार से 15 दिन में रिपोर्ट तलब
स्थानीय समुदायों की आजीविका प्रभावित होने और अनुसूचित जाति के सदस्यों को धमकाए जाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर संज्ञान लिया...
स्थानीय समुदायों की आजीविका प्रभावित होने और अनुसूचित जाति के सदस्यों को धमकाए जाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई-रिपोर्ट मांगी है।
मत्स्य व्यवसाय में व्यवधान की शिकायत ने खींचा आयोग का ध्यान
शिकायत शारीक मछली परिवार से संबंधित है, जिसे स्थानीय जलाशयों का वैध मत्स्य पालन अनुबंध प्राप्त है। NHRC सदस्य प्रियांक कनूनगो के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा बार-बार उनकी वैध मछली पकड़ने की गतिविधियों में बाधा डाली जा रही है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि समाज के अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले सदस्यों को डराया-धमकाया गया, गाली-गलौज की गई और उन्हें आजीविका कमाने से रोका गया। साथ ही झूठे एफआईआर दर्ज करने की धमकियाँ भी दी गईं।
जातिगत अपमान और जबरन बेदखली की कोशिश के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने 15 नवंबर को हुई घटना का हवाला देते हुए कहा कि विरोध करने वाले समूह ने झील क्षेत्र से सदस्यों को जबरन हटाने की कोशिश की और इलाके में भय तथा तनाव का माहौल बनाया।
आरोप है कि इस विरोध के दौरान जाति-आधारित आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जो मानवाधिकार और कानून—दोनों के लिहाज से गंभीर मामला बनता है।
सहकारी समिति में अनियमितताओं के आरोप भी शामिल
आजीविका में बाधा के अलावा, शिकायत में सहकारी समिति के संचालन को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। इनमें शामिल हैं—
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समिति में मनमाने ढंग से नए सदस्यों को जोड़ना
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वित्तीय गड़बड़ियाँ
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वैध सदस्यों को मत्स्य पकड़ने के अधिकार से वंचित करना
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वास्तविक सदस्यों को रोजगार न देना
शिकायतकर्ताओं ने NHRC से निष्पक्ष जांच, कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
NHRC ने उच्च अधिकारियों को भेजा नोटिस
आयोग ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों—
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प्रमुख सचिव, सहकारिता
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प्रमुख सचिव, मत्स्य विभाग
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कलेक्टर, भोपाल
को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई-रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
NHRC ने कहा है कि शिकायत में उठाए गए मुद्दे न केवल आजीविका के अधिकार से जुड़े हैं बल्कि समुदाय की सुरक्षा और सम्मान से भी संबंधित हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता से जांचना आवश्यक है।
