नेपाल: त्रिशूली-3A सुरंग में फंसे लोगों को बचाने का अभियान तेज, भारतीय दल पहुंचा
नेपाल की त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बाढ़ और भूस्खलन के बाद फंसे 350 से अधिक लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है। भारत ने भी राहत सामग्री और विशेषज्ञ दल भेजकर मदद का हाथ बढ़ाया है।

द क्लिफ न्यूज़ | काठमांडू | 29 अगस्त 2026
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, नेपाल सेना के जवानों ने अब तक 350 श्रमिकों और स्थानीय लोगों को सुरंग से सफलतापूर्वक निकाल लिया है, जबकि 100 से अधिक लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं।
बाढ़ के तीव्र बहाव और भारी मात्रा में जमा हुए मलबे ने बचाव कार्यों को अत्यधिक कठिन बना दिया है। सुरंग के आसपास कई स्थानों पर सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुँचने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, नेपाल सेना ने बचाव अभियानों में हेलीकॉप्टरों का भी उपयोग किया है, ताकि राहत सामग्री, आवश्यक उपकरण और बचावकर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाया जा सके।
सुरंग में फंसे लोगों को निकालना सर्वोपरि चुनौती
त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की सूचना मिलते ही नेपाल सेना और आपदा प्रबंधन दलों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया था। सुरंग के भीतर पानी और मलबे के प्रवेश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया था।
बचाव दलों को सुरंग के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचने के लिए मार्ग से मलबा हटाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर जलस्तर का बढ़ना और सुरंग की कमजोर होती संरचना बचाव अभियान में जोखिम को और बढ़ा रही है। बचावकर्मियों द्वारा अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी समय पानी या मलबे के तेज बहाव का खतरा बना हुआ है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में प्राकृतिक आपदा की भयावहता को देखते हुए, भारत ने भी राहत और बचाव प्रयासों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया है। भारत सरकार ने 10 टन राहत सामग्री के साथ-साथ एक विशेष मेडिकल और टनल-रेस्क्यू टीम नेपाल भेजी है।
भारतीय विशेषज्ञों और बचावकर्मियों की उपस्थिति से सुरंग में चल रहे बचाव अभियान को महत्वपूर्ण तकनीकी और चिकित्सा सहायता मिलने की उम्मीद है। राहत सामग्री में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक वस्तुओं को शामिल किया गया है। भारत की ओर से यह सहायता ऐसे समय में आई है, जब नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़कें, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
त्रिशूली नदी में भी जारी है तलाशी अभियान
सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के समानांतर, त्रिशूली नदी और उसके आसपास के इलाकों में भी बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल पुलिस के गोताखोरों और आपदा प्रबंधन दल नदी के तेज बहाव में शवों और लापता लोगों की खोज कर रहे हैं।
बाढ़ के पानी ने कई लोगों और वाहनों को बहा दिया है, जिससे नदी के निचले हिस्सों तक तलाशी अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया है। बचावकर्मियों को तेज जलधारा, मलबे के ढेर और प्रतिकूल मौसम के कारण लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई जा रही मदद
जिन इलाकों में सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो चुका है, वहाँ हेलीकॉप्टरों का उपयोग करके राहत सामग्री और बचाव दल भेजे जा रहे हैं। गंभीर रूप से घायल या बीमार व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों और चिकित्सा केंद्रों तक पहुँचाने के लिए भी हवाई सहायता का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा रहा है।
दुर्गम पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम और लगातार छाए रहने वाले बादलों के कारण हेलीकॉप्टर अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके बावजूद, नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य को निर्बाध रूप से जारी रखे हुए हैं।
पुनः बाढ़ का खतरा बना हुआ है
बचाव अभियान के बीच, मौसम की अनिश्चितता और दोबारा बाढ़ आने के खतरे को लेकर सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। भारी बारिश की स्थिति में पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन होने की प्रबल आशंका है। इससे सुरंग के आसपास काम कर रहे बचावकर्मियों के लिए खतरा और भी बढ़ जाता है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से नदी किनारे और जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। बचाव दल सुरंग के आसपास की स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं।
कई एजेंसियां राहत अभियान में जुटीं
त्रिशूली-3A सुरंग में बचाव अभियान को केवल सेना तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें नेपाल पुलिस, आपदा प्रबंधन दल, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न अन्य राहत एजेंसियां सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं। मार्ग से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि चिकित्सा दल बचाए गए लोगों के स्वास्थ्य की लगातार जाँच कर रहे हैं।
सुरक्षित बाहर निकाले गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कई लोगों को लंबे समय तक सुरंग के भीतर फंसे रहने के कारण थकान और मानसिक तनाव का अनुभव हुआ है।
आगे की चुनौती अभी भी बड़ी
350 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बचाव अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है, लेकिन सुरंग में अभी भी फंसे लोगों को निकालना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बचाव दल लगातार मलबा हटाने और सुरंग के भीतर सुरक्षित मार्ग बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
नेपाल में व्यापक स्तर पर चल रहे राहत अभियान के बीच, त्रिशूली-3A सुरंग अभियान पर पूरे देश के साथ-साथ भारत की भी विशेष नजर बनी हुई है। भारतीय बचाव और चिकित्सा टीमों की सहायता से इस अभियान को अतिरिक्त विशेषज्ञता मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में प्राथमिकता सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति तक सुरक्षित पहुँचकर उन्हें बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के बाहर निकालना है। खराब मौसम, मलबे और नदी के तेज बहाव के बावजूद, बचाव दल अथक रूप से अभियान में जुटे हुए हैं।
