BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
International

नेपाल त्रासदी: भारत की विशेष टीमें बचाव और डीएनए पहचान में जुटीं

नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत बचाव के लिए टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमों के साथ राहत सामग्री भेज रहा है। अज्ञात शवों की डीएनए पहचान भी सुनिश्चित की जा रही है।

Few hours ago
3 मिनट में पढ़ें
संवाददाता: शाश्वत तिवारी
नेपाल त्रासदी: भारत की विशेष टीमें बचाव और डीएनए पहचान में जुटीं

संवाददाता: शाश्वत तिवारी

द क्लिफ न्यूज़ | काठमांडू | 31 अगस्त 2026

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की भयावहता के बीच, भारत सरकार ने 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत राहत और बचाव कार्यों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विशेष तकनीकी दलों के साथ-साथ आवश्यक सामग्री की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रभावित इलाकों में जटिल चुनौतियों का सामना किया जा सके।

भारत की एक अत्याधुनिक टनल रेस्क्यू टीम विशेष उपकरणों के साथ काठमांडू पहुँच चुकी है। इस दल का मुख्य उद्देश्य हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसी के साथ, भीषण आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए भारत से 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम भी नेपाल भेजी गई है। यह टीम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मृतकों के डीएनए सैंपल एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने का कार्य कर रही है।

सुरंगों में बचाव अभियान और डीएनए पहचान

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत की टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग इलाकों में हाइड्रोपावर टनल साइटों पर नेपाली सेना की टीम के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। आधुनिक सेंसर और कटर जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग करके भारतीय इंजीनियर और विशेषज्ञ सुरंगों में सुरक्षित रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो इस कठिन परिस्थिति में नेपाल के लिए जीवन रक्षक साबित हो रहा है।

वहीं, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम आपदा में मारे गए अज्ञात शवों की तत्काल पहचान की गंभीर चुनौती से निपटने में नेपाली प्रशासन को पूरी तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इस सहायता से न केवल पीड़ितों की पहचान हो सकेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।

व्यापक मानवीय सहायता और नागरिकों की निकासी

विशेषज्ञ टीमों के अलावा, भारत सरकार मानवीय सहायता (एचएडीआर) पहुंचाने का अपना चौतरफा अभियान भी लगातार जारी रखे हुए है। भारतीय वायुसेना के विशेष सैन्य परिवहन विमानों के माध्यम से अब तक 68.5 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री और जीवन रक्षक दवाओं की चार बड़ी खेप काठमांडू भेजी जा चुकी हैं। दूतावास के अनुसार, 11 टन आवश्यक सामग्री की चौथी खेप सौंप दी गई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी महत्वपूर्ण राहत सामग्रियां शामिल हैं।

इस बीच, भारत सरकार बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के कार्य में भी पूरी मुस्तैदी से जुटी है। नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रसुवा जिले के गंभीर रूप से प्रभावित चिलिमे गांव से नेपाली सेना द्वारा सुरक्षित बचाए गए तीन भारतीय नागरिकों और उनके एक नेपाली सहयोगी से मुलाकात की। इससे पहले भी भारतीय मिशन के त्वरित प्रयासों से आपदाग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों के एक बड़े दल को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाला गया था, जो संकट के समय अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति भारतीय विदेश मंत्रालय की सर्वोच्च प्रतिबद्धता को दर्शाता है।