नेपाल में विनाशकारी बाढ़: 17 हजार बच्चे प्रभावित, 10 हजार की शिक्षा ठप
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से 17,000 से अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि 10,000 की शिक्षा ठप हो गई है। यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

द क्लिफ न्यूज़ | काठमांडू | 1 सितंबर 2026
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी अचानक आई बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन ने हजारों परिवारों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में कम से कम 17,000 बच्चे गंभीर रूप से आ चुके हैं। इन बच्चों के जीवन पर तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह के गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
बाढ़ और भूस्खलन का सबसे अधिक असर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में देखा गया है। इन क्षेत्रों में, प्राकृतिक आपदाओं ने घरों, स्कूलों, सड़कों और महत्वपूर्ण जल आपूर्ति व्यवस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रभावित समुदायों के लिए जीवनयापन और भी कठिन हो गया है।
शिक्षा पर गंभीर मार: 10,000 बच्चों का भविष्य अधर में
इस आपदा का सबसे गंभीर परिणाम बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन के कारण लगभग 18 स्कूल पूरी तरह से तबाह हो गए हैं, जबकि 20 अन्य स्कूलों को महत्वपूर्ण क्षति पहुंची है। स्कूलों के क्षतिग्रस्त होने और कई पहाड़ी इलाकों में आवागमन बाधित होने के कारण, लगभग 10,000 बच्चों की शिक्षा पूरी तरह से रुक गई है।
इन बच्चों को जल्द से जल्द शिक्षा प्रणाली में वापस लाने के लिए सुरक्षित शिक्षण वातावरण, आवश्यक शैक्षणिक सामग्री और मनोसामाजिक परामर्श की तत्काल आवश्यकता है। लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने से न केवल इन बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होगा, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
घरों और बुनियादी सुविधाओं का विनाश, विस्थापन की समस्या
विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों के घरों को नष्ट कर दिया है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल बह जाने के कारण सुदूर गांव अन्य क्षेत्रों से पूरी तरह कट गए हैं। पेयजल की महत्वपूर्ण प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रभावित परिवारों के सामने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता एक गंभीर चुनौती बन गई है।
परिणामस्वरूप, कई परिवारों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है और वे अस्थायी शिविरों में शरण लिए हुए हैं। इन शिविरों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित आश्रय, स्वच्छता सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राहत एजेंसियों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
आपदा के बाद बच्चों के सामने दोहरे संकट का खतरा
यूनिसेफ की नेपाल प्रतिनिधि, ऐलिस अकुंगा, ने इस बात पर जोर दिया है कि बाढ़ से जीवित बच निकलने के बाद भी बच्चों के सामने कई गंभीर खतरे बने हुए हैं। दूषित पानी और खराब स्वच्छता व्यवस्था के कारण संक्रामक बीमारियों और संभावित महामारियों का खतरा बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त, भोजन और पोषण की कमी के कारण बच्चों में कुपोषण का स्तर बढ़ने की आशंका है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
आपदा के दौरान परिवारों से बिछड़ गए बच्चों की सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता का विषय है। विभिन्न राहत एजेंसियां ऐसे बच्चों की पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। इसी के साथ, बच्चों को शोषण, हिंसा और अन्य जोखिमों से बचाने के लिए बाल संरक्षण सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।
तीव्र राहत और बचाव अभियान, अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
यूनिसेफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयासों को तेज कर दिया है। जरूरतमंद परिवारों को स्वच्छता किट, जीवन रक्षक सामग्री और आवश्यक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आपदा के कारण गहरे सदमे में आए बच्चों और उनके परिवारों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहायता कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
उन इलाकों तक सहायता पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण सामान्य आवागमन पूरी तरह से बाधित है। राहत एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंच सके।
बड़े पैमाने पर हुए नुकसान और प्रभावित लोगों की भारी संख्या को देखते हुए, राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय और भौतिक संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। यूनिसेफ और अन्य मानवीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि बच्चों और उनके परिवारों तक आवश्यक स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता तथा बाल संरक्षण सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। नेपाल में यह आपदा केवल तत्काल राहत का संकट नहीं है, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की एक बड़ी चुनौती भी बन गई है, जिसके लिए स्कूलों के पुनर्निर्माण, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की बहाली और विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी आवास की व्यवस्था जैसे दीर्घकालिक पुनर्वास प्रयासों की आवश्यकता होगी।
