नेपाल में भीषण बाढ़: 165 की मौत, 37 भारतीय यात्री अब भी लापता
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने कम से कम 165 जानें ले ली हैं और करीब 1500 लोगों के लापता होने की आशंका है, जिनमें कई भारतीय नागरिक शामिल हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | काठमांडू | 27 अगस्त 2026
नेपाल के रसुवा जिले में मंगलवार, 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों को प्रभावित करने वाली भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने विनाश का तांडव मचाया है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 165 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और लगभग 1500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, जिनमें पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं, की आशंका है।
यह विनाशकारी बाढ़ तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से शुरू हुई, जो सुबह करीब 9 बजे स्थानीय समयानुसार आई। इस अचानक आई बाढ़ ने रसुवा जिले के कई बस्तियों, बाजारों, सड़कों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। भूस्खलन के कारण कई जगहों पर मलबा फैल गया, जिससे बचाव कार्यों में भारी बाधा उत्पन्न हुई है। संचार व्यवस्था के बाधित होने से भी बचाव दलों के लिए प्रभावित लोगों से संपर्क साधना अत्यंत कठिन हो गया है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता, बचाव कार्य जारी
नेपाल में अचानक आई इस भीषण बाढ़ ने बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को प्रभावित किया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 57 तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के एक दल में से 21 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इन 21 यात्रियों को तिमुरे स्थित सशस्त्र पुलिस बल की चौकी पर शरण दी गई है, जिससे उनके परिवारों को कुछ राहत मिली है।
हालांकि, अभी भी 36 तमिलनाडु तीर्थयात्री और उनके वाहन चालक लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश और बचाव के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी तरह, कुल 57 भारतीय पर्यटक और तीर्थयात्री लापता बताए जा रहे हैं। एक समूह, जिसमें लगभग 77 तीर्थयात्री थे और ईशा फाउंडेशन से जुड़े थे, बाढ़ के समय आप्रवासन केंद्र में मौजूद थे। उनके सुरक्षित होने की पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है, जिससे उनके परिवारों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
तमिलनाडु सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नेपाल प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। नई दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस के अधिकारियों को काठमांडू में स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर फंसे हुए यात्रियों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया गया है।
सरकारी सहायता और हेल्पलाइन नंबर
तमिलनाडु सरकार ने अपने नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 309 3793 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय मिस्ड कॉल के लिए +91 80 6900 9900, अन्य नंबर +91 80 6900 9901 और नई दिल्ली में तमिलनाडु हाउस कंट्रोल रूम के नंबर 9289516712 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी भारतीयों की सहायता के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं: +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500। ये नंबर फंसे हुए भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को आवश्यक जानकारी और सहायता प्रदान करने के लिए स्थापित किए गए हैं।
आपदा का व्यापक प्रभाव और आगामी चिंताएँ
यह विनाशकारी बाढ़ रसुवा और नुवाकोट जिलों के साथ-साथ आसपास के पहाड़ी इलाकों में भी फैल गई है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। नदी के जलस्तर में अचानक नौ मीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट है कि बाढ़ कितनी तीव्र थी। इस आपदा ने न केवल जीवन और संपत्ति का नुकसान किया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर भी गहरा प्रभाव डाला है।
नेपाल के लिए यह घटना पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे समुदायों के लिए हाई-अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें ढेडिंग, गोरखा और चितवन जैसे जिले भी शामिल हैं। इस विनाश ने पड़ोसी भारतीय राज्यों, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जहां सतर्कता बढ़ा दी गई है।
नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के कर्मी बचाव और राहत कार्यों में लगे हुए हैं। कठिन भूभाग, खराब मौसम और बाधित संचार के बावजूद, वे लापता लोगों को खोजने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इस आपदा का पूरा आकलन और पुनर्निर्माण में काफी समय लगने की उम्मीद है।
