नई खेलो इंडिया योजना: ₹36,441 करोड़ से 10 गुना अधिक खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई खेलो इंडिया योजना के लिए ₹36,441 करोड़ की मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य 2030 तक खिलाड़ियों का विकास और भारत को खेल महाशक्ति बनाना है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 25 अगस्त 2026
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वाकांक्षी 'नई खेलो इंडिया योजना' के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ₹36,441 करोड़ की राशि को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान से लेकर ओलंपिक और पैरालंपिक स्तर तक के खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत विकास-श्रृंखला का निर्माण करना है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भोपाल में योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस नई योजना के माध्यम से, पिछले संस्करणों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक खिलाड़ियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मंत्री सारंग ने कहा कि आजादी के बाद खेल के बजट में यह अभूतपूर्व आठ गुना वृद्धि, खेल को युवा विकास और राष्ट्र निर्माण के एक प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नई खेलो इंडिया योजना का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में पहचान दिलाना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एक सुविचारित रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
खेल नीति और शिक्षा का संगम
नई योजना, 'खेलो भारत नीति 2025' और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के उद्देश्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए, खेलों को शिक्षा, फिटनेस, आधुनिक तकनीक और उच्च-प्रदर्शन प्रशिक्षण से जोड़ेगी। इसका उद्देश्य स्कूलों को प्रतिभा खोज के प्राथमिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि शुरुआती अवस्था में ही युवा प्रतिभाओं की पहचान की जा सके और वैज्ञानिक तरीकों से उनके कौशल का विकास सुनिश्चित किया जा सके।
इस नई व्यवस्था के तहत, प्रतिभा पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, नियमित खेल प्रतियोगिताएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव और ओलंपिक तैयारियों को एक संरचित विकास मार्ग से जोड़ा गया है। योजना में जमीनी स्तर की प्रतियोगिताओं से लेकर 'खेलो इंडिया कार्यक्रम' और फिर 'टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS)' तक खिलाड़ियों की प्रगति के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
समन्वित खेल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
यह योजना देशभर में खेल संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकरूपता लाने के उद्देश्य से एक व्यापक खेल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी। राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र (KISCE), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता प्राप्त खेल अकादमियां, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को इस एकीकृत ढांचे में शामिल किया जाएगा।
स्कूल स्तर पर प्रतिभा खोज को बढ़ावा देने के लिए, 'नए खेलो इंडिया फीडर स्कूल' और 'खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालयों' को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, 'इमरजिंग खेलो इंडिया एथलीट्स (E-KIAs)' के लिए एक संरचित एथलीट पूल का विस्तार किया जाएगा, जिससे लगभग दस गुना अधिक एथलीटों को इसका लाभ मिल सकेगा।
समावेशी खेल विकास पर जोर
योजना में 'फिट इंडिया मूवमेंट' का विस्तार, महिलाओं की खेलों में भागीदारी को प्रोत्साहन, सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार, तथा खेल-आधारित नशामुक्ति पहलों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। विशेष रूप से, पैरा-एथलीटों, पारंपरिक भारतीय खेलों को पुनर्जीवित करने और सामुदायिक विकास में खेलों की भूमिका को भी योजना में प्राथमिकता दी गई है।
खेल व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए, राष्ट्रीय कोच मान्यता बोर्ड के माध्यम से कोचिंग योग्यताओं के मानकीकरण पर बल दिया जाएगा। एक एकीकृत डिजिटल खेल मंच और निजी खेल अकादमियों तथा कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से खेल अधोसंरचना, शासन प्रणाली और खिलाड़ियों को मिलने वाली सहायता को सुदृढ़ किया जाएगा।
मध्य प्रदेश में खेल के नए अवसर
मध्य प्रदेश के लिए, यह योजना खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए नए और बड़े अवसर खोलेगी। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रदेश में खेलों में बड़े पैमाने पर निवेश के साथ भोपाल को एक 'स्पोर्ट्स हब' के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। प्रदेश में पहले से संचालित 52 'खेलो इंडिया सेंटर्स' को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा, और स्थानीय प्रतिभाओं व खेल क्षमताओं के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशिष्ट रणनीतियाँ विकसित की जाएंगी।
नई योजना राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी हुई सहायता प्रदान करेगी, जिससे कोचिंग, खेल उपकरण, खेल विज्ञान, विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहयोग सुनिश्चित होगा। यह योजना वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों, भारत की ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की आकांक्षाओं और 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
