नई गन्ना किस्मों को मिली मंजूरी: किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में गन्ना शोध परिषद ने खेती के लिए कई नई उन्नत किस्मों को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य उपज बढ़ाना और लाल सड़न...

गोण्डा | संवाददाता: बी पी त्रिपाठी
द क्लिफ न्यूज़ | गोण्डा | 1 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से गन्ना आयुक्त कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित 'बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति' ने प्रदेश की कृषि के लिए कई नवीन गन्ना किस्मों को मंजूरी प्रदान की है। इन नई किस्मों का चयन गन्ने की औसत उपज में वृद्धि और चीनी मिलों को बेहतर परता (शुगर रिकवरी) सुनिश्चित करने के लक्ष्य के साथ किया गया है।
बैठक में उ.प्र. गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए गए। अगेती किस्मों में 'को. शा. 23232' को मानक किस्म 'को. 0238' का एक प्रमुख विकल्प माना गया है। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस नई किस्म की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर पाई गई है, जो वर्तमान मानक किस्म से 9.44 प्रतिशत अधिक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति पूर्णतः प्रतिरोधी है, जो गन्ने की खेती में एक बड़ी समस्या रही है। इसके अतिरिक्त, 'को. शा. 23232' की पेड़ी (दूसरी फसल) भी अत्यधिक उत्पादक क्षमता रखती है।
लाल सड़न रोग प्रतिरोधी और अधिक उपज वाली किस्मों को प्रोत्साहन
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा विकसित किस्म 'को. लख. 21201' को भी संपूर्ण उत्तर प्रदेश के लिए स्वीकृति मिली है। यह किस्म अपने सीधे तने की संरचना और उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए पहचानी जाती है। इसके अलावा, मध्य व देर से पकने वाली किस्मों के संतुलन को बनाए रखने के लिए 'को. शा. 19235' और 'को. शा. 18232' जैसी किस्मों को भी रिलीज किया गया है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक सुनील कुमार शुक्ल ने बताया कि इन स्वीकृत बीजों की बुकिंग भविष्य में गन्ना शोध परिषद के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे किसानों को उन्नत गुणवत्ता वाले बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
इस निर्णय के साथ ही, उप समिति ने छह ऐसी पुरानी और कम लोकप्रिय किस्मों को भी अनुपयुक्त घोषित किया है, जिनका कृषिकार में अब विशेष महत्व नहीं रहा। इन किस्मों को आगामी दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खेती से हटा दिया जाएगा, ताकि किसानों का ध्यान नई और अधिक लाभकारी किस्मों पर केंद्रित हो सके।
ईवीएम वेयरहाउस की सुरक्षा और चुनावी तैयारी
जनपद गोण्डा में चुनावी तैयारियों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधि संपन्न हुई। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ईवीएम और वीवीपैट वेयरहाउस को आगामी प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) की तैयारी के क्रम में खोला गया। 30 सितंबर 2026 को निर्धारित प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन करते हुए, वीडियोग्राफी की कड़ी निगरानी में वेयरहाउस को खोला और बंद किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के रख-रखाव से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं निर्वाचन आयोग के निर्धारित मैनुअल के अनुसार ही संचालित की जा रही हैं, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
'विकसित भारत 2047' के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के सेवाकाल और 'विकसित भारत 2047' के महत्वाकांक्षी संकल्प को देश के हर नागरिक तक पहुंचाने के उद्देश्य से गोण्डा जनपद में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 7 अक्टूबर 2026 को 'सेवा ज्योति कलश यात्रा' का आयोजन प्रस्तावित है। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अंबेडकर चौराहे पर एक 'सेवा कलश' स्थापित किया जाएगा। इस कलश की स्थापना के उपलक्ष्य में, विभिन्न क्षेत्रों से पैदल, साइकिल और बाइक रैलियों के माध्यम से नागरिक यहां एकत्रित होंगे।
कार्यक्रम स्थल पर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की जाएगी, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री के संबोधन का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इस भव्य आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, संबंधित अधिकारियों को यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और स्वच्छता के संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि इस राष्ट्रव्यापी संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने वाले कार्यक्रम की तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोताही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्यक्रम नागरिकों को एक सामूहिक राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। इन विभिन्न गतिविधियों के परिणामस्वरूप, जनपद में एक सक्रिय प्रशासनिक वातावरण बना हुआ है, जो विकास और जन-सहभागिता पर केंद्रित है।
