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नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित प्रदर्शनी: पुलिसिंग और न्याय प्रक्रिया को समझना आसान

भोपाल में चल रही प्रदर्शनी में डायल-112 से लेकर क्राइम सीन की जांच और साइबर सुरक्षा तक, आमजन को आधुनिक पुलिसिंग की पूरी प्रक्रिया सजीव, मॉडल और नाट्य मंचन से समझाई जा रही है।

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नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित प्रदर्शनी: पुलिसिंग और न्याय प्रक्रिया को समझना आसान

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 6 अक्टूबर 2026

भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में चल रही नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित एक अनूठी प्रदर्शनी आमजन को आधुनिक पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था की जटिलताओं से परिचित करा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा 3 अक्टूबर को लोकार्पित यह पांच दिवसीय प्रदर्शनी, जो 7 अक्टूबर तक चलेगी, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध की सूचना प्राप्त होने से लेकर न्यायालय तक पहुंचने वाली पूरी प्रक्रिया को 14 विशेष ज़ोन में जीवंत रूप से प्रस्तुत कर रही है। मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से नागरिकों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों को पुलिस और न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है।

प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण डायल-112 प्रणाली है, जहां आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर पुलिस टीम के घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया का लाइव डेमो दिखाया जा रहा है। कंपनी के प्रतिनिधि कॉल टेकर की भूमिका निभाते हुए आपातकालीन कॉल लेने, आवश्यक जानकारी जुटाने और घटना का विवरण दर्ज करने का प्रदर्शन करते हैं। इसके बाद, पुलिस कर्मचारी डिस्पैचर की भूमिका में सूचना का विश्लेषण कर संबंधित पुलिस टीम को मौके के लिए रवाना करते हैं। इस दौरान, डायल-112 पर प्राप्त सूचना की रिसीविंग, सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स और वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग जैसी समन्वित व्यवस्थाओं को भी समझाया जा रहा है। प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक 1200 एफआरवी (फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल) वाहनों की गतिविधियों की निगरानी और समीक्षा का प्रदर्शन भी किया गया है, जो आधुनिक संचार व सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स को दर्शाता है।

साक्ष्य संकलन से न्यायालय तक की वैज्ञानिक यात्रा

प्रदर्शनी का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा अपराध स्थल की वैज्ञानिक जांच को 3D क्राइम सीन मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित करता है। यहां ग्रामीण परिवेश में गोली चलने और चाकू से हमला होने जैसी घटना के घटनास्थल का नाट्य मंचन किया जाता है, जिसमें चाकू, बोतल, कारतूस के खोखे और रक्त के निशान जैसे संभावित साक्ष्यों को दर्शाया गया है। प्रदर्शन के माध्यम से यह समझाया जा रहा है कि घटनास्थल को कैसे सुरक्षित किया जाता है, साक्ष्यों का संरक्षण कैसे होता है, और आवश्यकतानुसार एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) टीम, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ और डॉग स्क्वाड की सहायता से वैज्ञानिक जांच कैसे आगे बढ़ाई जाती है।

स्केल फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, फिंगरप्रिंट और जैविक साक्ष्यों के परीक्षण, कारतूस के खोखे के आधार पर सर्च ऑपरेशन, और अन्य भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की प्रक्रिया को भी सरल भाषा में समझाया जा रहा है। यदि किसी संदिग्ध की पहचान होती है, तो मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उपलब्ध जीएसआर (गनशॉट रेसिड्यू) परीक्षण किट से प्राथमिक परीक्षण की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई है। अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के लिए आवश्यक नमूनों को राज्य न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया भी बताई गई है। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ द्वारा फिंगरप्रिंट विकसित करने, लिफ्ट करने और उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

साइबर सुरक्षा: सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का महत्व

प्रदर्शनी में साइबर अपराधों से बचाव और ठगी की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों पर विशेष जोर दिया गया है। नागरिकों को यह जानकारी दी जा रही है कि किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। प्रदर्शनी में 'गोल्डन ऑवर' के महत्व को समझाया गया है, जिसके तहत घटना की जितनी जल्दी सूचना मिलेगी, ठगी की रकम को ट्रैक करने और फ्रीज कराने के प्रयास उतने ही प्रभावी होंगे। ₹25,000 से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी, ऑनलाइन जॉब स्कैम, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे मामलों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

नागरिकों को 'म्यूल अकाउंट' के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है, जिसके तहत किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपयोग करने देना या अनजान लोगों से पैसे लेकर उन्हें नकद देना साइबर अपराध में संलिप्तता का कारण बन सकता है। 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति भी सचेत किया गया है, यह स्पष्ट करते हुए कि पुलिस में ऐसे किसी प्रावधान का अस्तित्व नहीं है। किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या धन की मांग पर घबराने के बजाय तत्काल संबंधित माध्यम से शिकायत करने का सुझाव दिया गया है।

प्रदर्शनी का आज का आकर्षण: वैज्ञानिक अनुसंधान और 'ऑपरेशन मुस्कान'

आज, 6 अक्टूबर को, प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान चरण का विशेष नाट्य मंचन किया जाएगा। इसमें एफएसएल विशेषज्ञों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टर/मेडिकल टीम की भूमिका के माध्यम से घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक जांच के लिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को दर्शाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 'ऑपरेशन मुस्कान' को एक विशेष फीचर के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अंतर्गत, गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, पुलिस टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों पर की जाने वाली कार्रवाई, उनकी पहचान व सत्यापन तथा उन्हें सुरक्षित रूप से परिजनों तक पहुंचाने की संवेदनशील प्रक्रिया को प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रदर्शनी में स्थापित हेल्प डेस्क पर आगंतुकों को प्रदर्शनी के विभिन्न ज़ोन, पुलिस की आधुनिक व्यवस्थाओं और प्रदर्शित प्रक्रियाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी जिज्ञासाओं का समाधान हो सके और वे प्रदर्शनी के विभिन्न हिस्सों को बेहतर ढंग से समझ सकें।