नौकरी छोड़ युवा उद्यमी बना शिवम, अगरबत्ती व्यवसाय से रचे नए मानक
फर्रुखाबाद के शिवम दुबे ने नौकरी छोड़ अगरबत्ती निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की मदद से उन्होंने जनवरी 2026 में अपना काम शुरू किया और आज उनके उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 12 अगस्त 2026
फतेहगढ़ के विजाधरपुर निवासी युवा शिवम दुबे ने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खुद की राह बनाते हुए एक मिसाल पेश की है। एक समय उड़ीसा में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत शिवम ने पारिवारिक कारणों से वर्ष 2014 में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कई तरह के काम किए, लेकिन उन्हें वह संतुष्टि नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी। इसी बीच, एक सरकारी योजना की जानकारी ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी और यहीं से नौकरी से उद्यमिता की ओर उनका सफर शुरू हुआ।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिलने पर शिवम को लगा कि यह वही अवसर है जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने इस योजना के तहत प्रशिक्षण लिया, अगरबत्ती निर्माण की बारीकियों को सीखा और अपने उद्यमिता के सपने को साकार करने की तैयारी शुरू की। जनवरी 2026 में ऋण स्वीकृत होने के उपरांत, उन्होंने आवश्यक मशीनें मंगाईं और उत्पादन प्रारंभ किया। उनकी अथक मेहनत और समर्पण रंग लाया और आज उनका कारोबार न केवल विजाधरपुर और फर्रुखाबाद तक, बल्कि अन्य जनपदों तक भी फैल चुका है। इसके अतिरिक्त, वे ऑनलाइन माध्यमों से भी अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।
अगरबत्ती निर्माण की बारीकियां सीखीं
सरकारी योजना की जानकारी मिलने के बाद, शिवम दुबे ने प्रशिक्षण के लिए एफएफडीसी कन्नौज का रुख किया। वहां उन्होंने इत्र, अगरबत्ती निर्माण और इससे जुड़े व्यावसायिक पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अपने स्तर पर किए गए अध्ययन के आधार पर, उन्होंने अगरबत्ती निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए योजना के तहत आवेदन किया। जनवरी 2026 में उनका ऋण स्वीकृत होने के बाद, शिवम ने कानपुर और अहमदाबाद से जरूरी मशीनें मंगवाकर अपने उद्यम की शुरुआत की। शुरुआती दौर में व्यवसाय को स्थापित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन उन्होंने धैर्य और कड़ी मेहनत से उत्पादन और बाजार दोनों पर समान रूप से ध्यान केंद्रित किया।
छोटे कदमों से बढ़ा कारोबार
धीरे-धीरे, उनके व्यवसाय ने गति पकड़ना शुरू कर दिया। अपने उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार की मांग को समझते हुए, उन्होंने जीएसटी पंजीकरण कराया और अपने व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। इसके परिणामस्वरूप, उनके उत्पादों की बिक्री फर्रुखाबाद सहित आसपास के जनपदों में भी शुरू हो गई। समय के साथ, शिवम ने बदलते बाजार की जरूरतों को पहचाना और अपने व्यवसाय को ऑनलाइन बाजार से भी जोड़ा। आज उनके उत्पाद फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर भी ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। इस प्रकार, विजाधरपुर से शुरू हुई यह छोटी सी पहल अब स्थानीय बाजार की सीमाओं को लांघकर डिजिटल बाजार में अपनी पहचान बना चुकी है।
नौकरी से अधिक आत्मसंतोष उद्यमिता में
शिवम दुबे का मानना है कि नौकरी में एक निश्चित आय प्राप्त होती है, लेकिन अपने स्वयं के व्यवसाय को खड़ा करने और उसे विकसित करने से मिलने वाली आत्मसंतुष्टि अद्वितीय है। उनका लक्ष्य अपने व्यवसाय का विस्तार करना और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
युवा दिवस के अवसर पर शिवम दुबे की यह यात्रा उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो मानते हैं कि विषम परिस्थितियां भी दृढ़ इच्छाशक्ति, सही अवसर, प्रशिक्षण और अथक परिश्रम के सामने बौनी साबित हो सकती हैं। आज, जब बड़ी संख्या में युवा सरकारी और निजी नौकरियों की तलाश में लगे हुए हैं, वहीं शिवम की कहानी यह संदेश देती है कि रोजगार मांगने वाले बनने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने का सपना देखना भी संभव है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना उनके लिए एक सेतु साबित हुई, जिसने आत्मनिर्भरता की उनकी सदियों पुरानी तलाश को मंजिल तक पहुंचाया। युवा दिवस के उपलक्ष्य में शिवम दुबे की कहानी केवल एक अगरबत्ती उद्योग की कहानी नहीं है, बल्कि यह आज के बदलते भारत के उस युवा की कहानी है जो नौकरी की तलाश से आगे बढ़कर अपने हाथों से अपने भविष्य को गढ़ने का साहस कर रहा है।
शिवम दुबे की उद्यमिता की यात्रा केवल एक अगरबत्ती निर्माण इकाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक युवा अपनी सोच और लगन से पारंपरिक नौकरी की परिधि से बाहर निकलकर नए अवसर पैदा कर सकता है। पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वर्ष 2014 में उड़ीसा की सहायक अभियंता की नौकरी छोड़ने के बाद, शिवम ने कई छोटे-बड़े काम किए, लेकिन उन्हें कहीं भी वह संतुष्टि नहीं मिली जो वे तलाश रहे थे। यह असंतोष उन्हें कुछ नया और अपना करने के लिए प्रेरित करता रहा।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का पता चलना उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस योजना ने उन्हें न केवल वित्तीय सहायता का मार्ग दिखाया, बल्कि तकनीकी प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया। एफएफडीसी कन्नौज में प्रशिक्षण के दौरान, उन्होंने अगरबत्ती निर्माण की तकनीक, विभिन्न प्रकार की सुगंधों का उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार की मांग को समझना सीखा। यह प्रशिक्षण उनके लिए एक मजबूत नींव साबित हुआ, जिसने उनके व्यावसायिक सपने को वास्तविकता में बदलने की राह आसान कर दी।
जनवरी 2026 में ऋण स्वीकृति के बाद, शिवम ने तत्काल आधुनिक मशीनें स्थापित कीं। शुरुआत में, उन्हें उत्पादन की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया को सुधारा, गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया और अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। धीरे-धीरे, उनके अगरबत्तियों की गुणवत्ता और सुगंध की मांग बढ़ने लगी। फर्रुखाबाद के स्थानीय बाजार में सफलता मिलने के बाद, उन्होंने अपने व्यवसाय को पड़ोसी जिलों तक फैलाने की योजना बनाई।
बाजार की बदलती प्रवृत्तियों और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं को देखते हुए, शिवम ने अपने व्यवसाय को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने का साहसिक कदम उठाया। फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स पोर्टलों पर अपने उत्पादों को सूचीबद्ध करके, उन्होंने अपने लक्षित ग्राहकों के दायरे को काफी बढ़ा लिया। आज, विजाधरपुर के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका यह उद्यम राष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों तक पहुंच रहा है, जो उनके दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत का परिणाम है।
शिवम दुबे का मानना है कि उद्यमिता में मिलने वाला आत्म-संतुष्टि किसी भी नौकरी से कहीं अधिक है। यह केवल आय का स्रोत नहीं है, बल्कि यह अपनी पहचान बनाने, दूसरों को रोजगार देने और समाज में योगदान करने का एक माध्यम है। उनका लक्ष्य अपनी कंपनी को और भी बड़ा बनाना और अधिक से अधिक युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
युवा दिवस के इस अवसर पर, शिवम दुबे की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है जो सीमित संसाधनों या पारिवारिक दबावों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। यह कहानी दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं, जब सही मानसिकता और दृढ़ संकल्प के साथ जोड़ी जाती हैं, तो वे सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। शिवम जैसे युवा बदलते भारत की उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो केवल नौकरी ढूंढने के बजाय, खुद रोजगार के अवसर सृजित करने में विश्वास रखती है। उनकी उद्यमिता की यात्रा एक शक्तिशाली अनुस्मारक है कि साहस, नवाचार और कड़ी मेहनत से कोई भी व्यक्ति अपनी नियति का निर्माता बन सकता है।
