नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0: मध्य प्रदेश पुलिस का जन-जन तक जागरूकता अभियान
मध्य प्रदेश पुलिस 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के सातवें दिन जनभागीदारी से नशामुक्ति संदेश को लाखों नागरिकों तक पहुँचाने में सफल रही।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के तहत सातवें दिन भी प्रदेश भर में जनभागीदारी से नशामुक्ति का संदेश लाखों नागरिकों तक पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी, विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, औद्योगिक इकाइयों, धार्मिक स्थलों, हाट-बाजारों, बस स्टैंडों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से संवाद कर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य नशामुक्त समाज का निर्माण करना है।
यह जन-जागरूकता अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को नशे के विरुद्ध संगठित करने का एक व्यापक जनआंदोलन बनता जा रहा है। इसके माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों, अभिभावकों और समाज के हर वर्ग को जोड़कर एक स्वस्थ एवं सुरक्षित मध्यप्रदेश का निर्माण करने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी दिनों में भी ऐसे ही व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे।
नवाचारों से जनसंवाद को प्रभावी बनाया गया
अभियान के सातवें दिन इंदौर कमिश्नरेट में तीन जागरूकता रथों, 25 एलईडी स्क्रीन और 60 बड़े बिलबोर्ड के माध्यम से लगातार नशामुक्ति संदेश प्रसारित किए गए। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चित्रकला, स्लोगन, रंगोली, कविता, निबंध और ओपन माइक जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। थाना क्षेत्रों, चौराहों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों से सीधे संवाद कर नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया रील्स, पॉडकास्ट और मोहल्ला समितियों की बैठकों के माध्यम से अभियान को डिजिटल और सामुदायिक दोनों स्तरों पर प्रभावी बनाया गया है।
खंडवा जिले में पुलिस ने 28 विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें शहर में संयुक्त बाइक रैली निकालकर नागरिकों को नशे के विरुद्ध जागरूक किया गया। स्कूलों, छात्रावासों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, बस स्टैंडों और ओंकारेश्वर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी जनसंवाद कार्यक्रम हुए। खरगोन पुलिस ने विद्यालयों में प्रतियोगिताओं के साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऑनलाइन नशामुक्ति की शपथ दिलाई। डायल-112 वाहनों के माध्यम से ऑडियो जिंगल प्रसारित किए गए और नगर निगम की एलईडी स्क्रीन पर निरंतर नशामुक्ति संदेश प्रदर्शित किए गए। व्यापारिक संगठनों, वाहन संघों, पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर समाज के प्रत्येक वर्ग को अभियान से सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। अस्पतालों, खदान क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
पारंपरिक और विविध माध्यमों का उपयोग
अलीराजपुर जिले में स्थानीय आदिवासी संस्कृति को अभियान का हिस्सा बनाया गया, जहां हाट-बाजारों में पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय बोली में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। अनूपपुर जिले में विभिन्न स्कूलों और महाविद्यालयों में पेंटिंग प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैलियां और सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। बैंकों, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया।
पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन ने एक अनूठी पहल करते हुए भैरूगढ़ स्थित सेंट्रल जेल में 300 कैदियों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी और उन्हें अपराध व नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। इंदौर के आरएपीटीसी (RAPTC) रामकृष्ण मिशन स्कूल और शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई कन्या पीजी महाविद्यालय में पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें विजेताओं को मेडल और सर्टिफिकेट देकर प्रोत्साहित किया गया।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी सक्रियता
आगर-मालवा, अशोकनगर, उमरिया, कटनी, विदिशा, इंदौर ग्रामीण सहित प्रदेश के अनेक जिलों में भी विद्यालयों, ग्राम सभाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, छात्रावासों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण नागरिकों को नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी प्रेरित करने का संदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचारों को अपनाकर अभियान को अत्यंत प्रभावी बनाया है।
