नर्मदापुरम न्यायालय में स्वास्थ्य शिविर, 350 से अधिक की जांच
नर्मदापुरम जिला न्यायालय में 19 सितंबर को आयोजित स्वास्थ्य शिविर में न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं सहित 350 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य जांच करवाई।

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: मुकेश भदौरिया
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 19 सितंबर 2026
नर्मदापुरम जिला न्यायालय परिसर में 19 सितंबर को एक दिवसीय वृहद स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं सहित 350 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य जांच करवाई। यह आयोजन जबलपुर उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार संपन्न हुआ।
शिविर का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृप्ति शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर तृतीय जिला न्यायाधीश वर्षा शर्मा, विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार नोटिया, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फिरोज अख्तर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव के. शिवानी सहित न्यायपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राजपूत और अन्य अधिवक्तागण ने भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।
चिकित्सकों ने दी स्वास्थ्य सेवाएं और परामर्श
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरसिंह गहलोत के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और आयुष विभाग के अमले ने शिविर में स्वास्थ्य जांच की प्रक्रियाएं संपन्न कीं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों को उनके स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिए और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराई और चिकित्सकों से नि:शुल्क स्वास्थ्य सलाह प्राप्त की।
संतुलित जीवनशैली पर दिया गया जोर
प्रधान जिला न्यायाधीश तृप्ति शर्मा ने शिविर को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य को मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी बताया। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और व्यक्तिगत स्वच्छता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। न्यायाधीश शर्मा ने इस बात पर भी बल दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना और समय-समय पर शारीरिक परीक्षण करवाना दीर्घायु जीवन के लिए अनिवार्य है।
यह स्वास्थ्य शिविर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सामुदायिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय परिवार के सदस्यों को अपनी स्वास्थ्य की स्थिति जानने और विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त करने का यह एक सुअवसर था।
