नर्मदापुरम में दशलक्षण पर्व: उत्तम शौच धर्म ने सिखाया त्याग और संतोष का पाठ
नर्मदापुरम के जिनालयों में दशलक्षण पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौच धर्म की आराधना हुई। श्रद्धालुओं ने मन की शुद्धि और संतोषपूर्ण जीवन...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: मुकेश भदौरिया
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 19 सितंबर 2026
नर्मदापुरम का दिगंबर जैन समाज दशलक्षण पर्युषण महापर्व के चतुर्थ दिवस पर आध्यात्मिक उल्लास में डूबा रहा। नगर के विभिन्न जिनालयों में सुबह से ही भगवान जिनेंद्र का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इन आयोजनों ने मंदिरों में धर्मप्रभावना का वातावरण बनाया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर 'उत्तम शौच धर्म' की आराधना की गई, जिसका मूल भाव मन, वचन और काया की पवित्रता के साथ लोभ एवं परिग्रह का त्याग कर संतोष को जीवन में उतारना है। धर्म सभाओं में विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची शुचिता केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि मन से ईर्ष्या, द्वेष और कुदृष्टि जैसे विकारों को दूर करने में निहित है। यह समझाया गया कि मनुष्य की वास्तविक समृद्धि धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि उसके मन में स्थित संयम, सहजता और निर्मलता में है।
मन की शुद्धि पर विद्वानों का बल
इंदौर से पधारे विद्वानों ने अपने प्रवचनों में कई दृष्टांतों के माध्यम से मन की शुद्धि और इच्छाओं को सीमित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अत्यधिक धन होने के बावजूद लोभ व्यक्ति को आंतरिक रूप से दरिद्र बनाए रखता है। इसके विपरीत, इच्छाओं को सीमित करना ही सुख और संतोषपूर्ण जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दौरान, श्रद्धालुओं ने झूठ, कटु वचन और निंदा जैसे अवगुणों से बचने का संकल्प लिया।
विश्व शांति और राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना
पर्युषण महापर्व के तत्वावधान में सकल दिगंबर जैन समाज ने विश्व शांति और राष्ट्र कल्याण के लिए विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किए। इन आयोजनों में पर्यावरण संरक्षण, अहिंसा और जीवदया की भावना को प्रमुखता दी गई। सभी ने सामूहिक रूप से विश्व में सद्भाव और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना की।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से धार्मिक संदेश
संध्याकाल में मंगल आरती और भक्तिपूर्ण प्रवचनों के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। विद्यासागर पाठशाला के विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक संदेशों का प्रभावी ढंग से प्रसार किया, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। संपूर्ण आयोजन के दौरान समाजजनों में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक गहराई देखने को मिली। उत्तम शौच धर्म का यह संदेश आत्मिक संतोष और लोभ से मुक्ति के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है।
