नर्मदापुरम में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर मां भगवती की भव्य महाआरती संपन्न
नर्मदापुरम के चैतन्य नगर मालाखेड़ी में हिन्दू पुत्र उत्सव समिति ने नवरात्रि अष्टमी पर मां भगवती की महाआरती का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में...

Narmadapuram | संवाददाता: Suyash Mishra
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 18 अक्टूबर 2026
नर्मदापुरम के चैतन्य नगर स्थित मालाखेड़ी में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के पावन अवसर पर हिन्दू पुत्र उत्सव समिति द्वारा मां भगवती की एक भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया और देश व समाज की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। समिति की महिला सदस्यों ने मां दुर्गा का मनमोहक श्रृंगार किया, जो इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रहा। दीपों की टिमटिमाती रोशनी और मां भगवती के जयकारों से पूरा वातावरण भक्ति और आस्था के रस में सराबोर हो गया।
कालरात्रि की महिमा और धर्म-सेवा का संदेश
इस अवसर पर उपस्थित पंडित संदीप शर्मा ने मां कालरात्रि के स्वरूप की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि देवी का यह रूप भक्तों को समस्त भय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है। पंडित शर्मा ने श्रद्धालुओं को धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे हृदय से की गई मां की उपासना भक्तों के भीतर साहस और आत्मबल का संचार करती है।
सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास
समिति के अध्यक्ष हर्षित कौशल ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य धार्मिक आस्था को और सुदृढ़ करना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। उन्होंने आगे कहा कि मां की आराधना से व्यक्ति के मन को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी दीपक कौशल, सुयश मिश्रा, शिवम, अभिमन्यु, संगीता मिश्रा, योगिता सिरोही और किरण कौशल सहित अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इस महाआरती के माध्यम से समाज में आपसी सद्भाव और सामूहिक श्रद्धा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां जगत जननी से जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण इस आयोजन ने स्थानीय निवासियों के बीच एकता की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की और सभी ने विधि-विधान से संपन्न हुई इस महाआरती में सम्मिलित होकर स्वयं को धन्य महसूस किया।
