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नर्मदापुरम में बंगाली परंपरा से दुर्गा पूजा का 31वां आयोजन

नर्मदापुरम में श्री श्री शारदीय महोत्सव 31वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। यहाँ कोलकाता की माटी से बनी माँ दुर्गा की प्रतिमाओं की पूजा...

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•संवाददाता: Suyash Mishra
नर्मदापुरम में बंगाली परंपरा से दुर्गा पूजा का 31वां आयोजन

Narmadapuram | संवाददाता: Suyash Mishra

द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 21 अक्टूबर 2026

नर्मदापुरम के मालाखेड़ी क्षेत्र स्थित चक्कर रोड पर श्री श्री शारदीय महोत्सव अपने 31वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। यह धार्मिक आयोजन, जिसे स्व. श्री शंकर चंद्र नाथ ने आरंभ किया था, अब नगरवासियों के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। महोत्सव की सबसे अनूठी विशेषता माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण है, जिसके लिए विशेष रूप से कोलकाता से लाई गई पवित्र मिट्टी का उपयोग किया जाता है।

हर वर्ष, पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर के कुशल मूर्तिकार नर्मदापुरम आकर माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं को आकार देते हैं। पूजा-अर्चना की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी तरह से बंगाली रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के अनुसार संपन्न की जाती है। महाषष्ठी के बोधन से लेकर विजयादशमी तक, इस दौरान विशेष रूप से पुष्पांजलि, आरती, भोग और प्रसाद वितरण जैसे कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

भव्य प्रतिमा निर्माण और सांस्कृतिक परंपरा

मालाखेड़ी स्थित चक्कर रोड पर, रिलायंस टॉवर के सामने बने पांडाल में, बंगाली परंपरा के अनुसार माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देकर पूजा-अर्चना के लिए तैयार किया गया है। कोलकाता की पवित्र माटी से हर वर्ष इन भव्य प्रतिमाओं को तैयार करने की परंपरा बीते तीन दशकों से चली आ रही है और यह नगरवासियों की आस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है।

तीन दशकों से आस्था का केंद्र

आयोजन के मुख्य प्रबंधकों में श्री धीरेंद्र चन्द्र देवनाथ, श्री कार्तिक नाथ, श्रीमती शेफालिका नाथ, श्रीमती मुक्ता दत्ता और श्री मनोजीत पाल शामिल हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार पधारकर माँ दुर्गा के दर्शन करने और इस उत्सव में शामिल होने की अपील की है। बीते तीन दशकों से निरंतर जारी यह आयोजन अब क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन चुका है, जहाँ भक्त बड़ी संख्या में पहुँचकर माँ की आराधना कर रहे हैं और बंगाली संस्कृति की झलक देख रहे हैं।

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