नर्मदापुरम के सेठानीघाट पर पितृ तर्पण को उमड़ी आस्था की लहर
नर्मदापुरम के सेठानीघाट पर श्राद्ध पक्ष में पितरों के मोक्ष और शांति के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने तर्पण व जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: मुकेश भदौरिया
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 26 सितंबर 2026
नर्मदांचल की जीवनदायिनी माँ नर्मदा के पावन तट पर स्थित प्रसिद्ध सेठानीघाट पर श्राद्ध पक्ष के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश भर से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के मोक्ष और शांति की कामना के साथ पवित्र नर्मदा जल में डुबकी लगाई और विधि-विधान से तर्पण व जलाभिषेक किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सेठानीघाट पर किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुँचता है और पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तिल, जौ, फूल और शुद्ध जल अर्पित कर अपने पूर्वजों को नमन किया। पंडितों द्वारा संपन्न कराए गए अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तर्पण
इस पावन अवसर पर, नर्मदा के सेठानीघाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण अनुष्ठान का आयोजन किया गया। श्रद्धालु, जिनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे, ने श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों को जल और तिल अर्पित किए। पं. रामेश्वर शर्मा ने बताया कि श्राद्ध पक्ष पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का समय होता है। उन्होंने कहा कि तर्पण की प्रक्रिया में मंत्रों का विशेष महत्व होता है, जो पितरों तक हमारी भावनाएं पहुंचाने में सहायक होते हैं। घाट पर उपस्थित पुरोहितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करवाई, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया।
सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम
स्थानीय प्रशासन ने इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित किए थे। जिला प्रशासन और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में घाट की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात थीं। सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने में मुस्तैदी दिखाई, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। घाट पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के लिए एक मेडिकल कैंप भी लगाया गया था।
पारंपरिक अनुष्ठानों का निर्वहन
तर्पण की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत, श्रद्धालुओं ने ब्राह्मण भोज का आयोजन किया। इसके अतिरिक्त, अन्नदान और दीपदान जैसे पुण्य कर्मों द्वारा भी अपने पूर्वजों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य करते हैं। पितृ पक्ष के महत्व को देखते हुए, सेठानीघाट पर दिन भर लोगों का तांता लगा रहा, जहाँ आस्था का एक अनूठा और हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला।
सेठानीघाट पर पितृ तर्पण की परंपरा सदियों पुरानी है और प्रतिवर्ष श्राद्ध पक्ष में यहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। शांति और मोक्ष की कामना लिए आए लोगों ने अत्यंत श्रद्धा के साथ अपने पितरों को स्मरण किया और दान-पुण्य के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि माँ नर्मदा के सानिध्य में अपने पूर्वजों का तर्पण करना उन्हें विशेष शांति और संतुष्टि प्रदान करता है।
