BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Regional

नरसिंहपुर में जंगली सुअरों का आतंक, किसानों ने मुआवजे की मांग की

नरसिंहपुर जिले में जंगली सुअरों ने मक्का और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय किसान यूनियन ने कलेक्टर से सर्वे और मुआवजे की मांग की है।

Few hours ago
4 मिनट में पढ़ें
नरसिंहपुर में जंगली सुअरों का आतंक, किसानों ने मुआवजे की मांग की

द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहपुर | 7 सितंबर 2026

नरसिंहपुर जिले के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर जहां अत्यधिक बारिश से सोयाबीन और उड़द की फसलों को नुकसान पहुंचा है, वहीं दूसरी ओर जंगली सुअरों का आतंक उनकी बची-खुची मेहनत पर भी पानी फेर रहा है। करेली और कुम्हड़ी जैसे क्षेत्रों में जंगली सुअरों के झुंड खेतों में घुसकर मक्का और गन्ने की फसलों को बड़े पैमाने पर बर्बाद कर रहे हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और चिंताजनक हो गई है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष विमलेश कुमार लोधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को एक आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में उन्होंने प्रभावित किसानों के खेतों का तत्काल सर्वे कराने और हुए नुकसान के आधार पर उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि जंगली सुअरों द्वारा फसलों को पहुंचाया जा रहा नुकसान किसानों की कमर तोड़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो कई किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं।

करेली तहसील में सुअरों का कहर

करेली तहसील के ग्राम कुम्हड़ी के किसान पूरन सिंह पटेल ने कलेक्टर को संबोधित अपने आवेदन में बताया कि उनके और गांव के अन्य किसानों, जिनमें अनिल पटेल, हक्की बाई, सुभद्रा बाई, अमित पटेल और अंजना पटेल शामिल हैं, के खेतों में लगी मक्का और गन्ने की फसलें जंगली सुअरों द्वारा लगातार नष्ट की जा रही हैं। इन किसानों के खेतों के खसरा नंबरों का भी उल्लेख आवेदन में किया गया है, जो नुकसान की गंभीरता को दर्शाते हैं। फसलें पूरी तरह चौपट होने की कगार पर हैं, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है।

यूनियन ने मांग की है कि प्रशासन द्वारा मौका निरीक्षण कर नुकसान का सही आकलन किया जाए, ताकि पीड़ित किसानों को तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराई जा सके। संगठन का मानना है कि यदि नुकसान का सटीक मूल्यांकन और समय पर मुआवजा नहीं मिला, तो किसानों के लिए अगली फसल की बुवाई करना भी मुश्किल हो जाएगा।

बड़गुंवा में भी स्थिति गंभीर

इसी क्रम में, बड़गुंवा गांव के किसान धर्मपाल लोधी ने भी 7 सितंबर को कलेक्टर को एक आवेदन सौंपकर जंगली सुअरों के आतंक से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि उनके खेत के साथ-साथ राधा बाई और देवेंद्र सिंह की कृषि भूमि में भी जंगली सुअर घुसकर मक्का और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि ये जानवर रात में या सुबह-सुबह खेतों में घुसकर कम समय में ही काफी बर्बादी कर देते हैं, जिससे उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है।

किसानों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी कदम उठाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि केवल मुआवजा देना ही काफी नहीं है, बल्कि जंगली सुअरों को खेतों से दूर रखने के उपायों पर भी विचार किया जाना चाहिए। यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है।

अधिक बारिश और बीमारियों का दोहरा आघात

जंगली सुअरों के आतंक के अलावा, इस वर्ष हुई अत्यधिक बारिश ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान यूनियन ने अपने आवेदन में इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि अधिक बारिश के कारण सोयाबीन और उड़द की फसलों में जड़ गलन और पीला मोजेक जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। इन बीमारियों ने भी किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। जड़ गलन की समस्या से फसलें सूख रही हैं, जबकि पीला मोजेक वायरस से पौधों का विकास रुक जाता है और उपज पर भारी असर पड़ता है।

यूनियन ने प्रशासन से पूरे जिले में व्यापक स्तर पर फसल सर्वे कराने की मांग की है, ताकि प्राकृतिक आपदा (बारिश) और जंगली जानवरों से हुई कुल क्षति का सही आकलन किया जा सके। इस सर्वे के आधार पर ही प्रभावित किसानों को राहत राशि प्रदान की जानी चाहिए। किसानों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी व्यथा को समझेगा और जल्द से जल्द राहत पैकेज की घोषणा करेगा, जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक सुधार सकें।