नरसिंहगढ़ में श्रावणी उपाकर्म एवं हेमाद्रि-प्रायश्चित हवन का आयोजन
नरसिंहगढ़ के श्री दूधिया दिवान गुरूकुलम में ब्राह्मण बटुकों और समाजजनों ने श्रावणी उपाकर्म, हेमाद्रि संकल्प और प्रायश्चित हवन में भाग लिया।

द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 27 अगस्त 2026
नरसिंहगढ़ के संवासी रोड स्थित श्री दूधिया दिवान गुरूकुलम में आज श्रावणी उपाकर्म, हेमाद्रि संकल्प एवं प्रायश्चित हवन का एक दिव्य और विधिवत आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में गुरूकुलम में अध्ययनरत ब्राह्मण बटुकों के साथ-साथ आसपास के ब्राह्मण समाजजनों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
प्रातः 7 बजे से शुरू हुए इस अनुष्ठान का संचालन गुरूकुलम के संचालक वेदाचार्य डॉ. जगदीश शास्त्री जी ने किया। उनके सानिध्य में आचार्य समर्थ शास्त्री जी, सागर उपाध्याय जी एवं चंद्रमोहन शास्त्री जी ने सभी उपस्थित ब्राह्मण बटुकों और समाजजनों को शास्त्रोक्त विधि से दशविधि स्नान कराया। इसके उपरांत, मंत्रोच्चार और वैदिक विधान के साथ यज्ञोपवीत परिवर्तन संपन्न हुआ और प्रायश्चित हवन की पूर्णाहुति हुई।
श्रावणी उपाकर्म का महत्व
वेदाचार्य डॉ. जगदीश शास्त्री जी ने इस अवसर पर सभी उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए श्रावणी उपाकर्म के गहन आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलने का परंपरागत अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संस्कारों के नवीनीकरण, स्वाध्याय और एक शुद्ध वैदिक जीवन पद्धति के प्रति पुनः संकल्पित होने का एक पवित्र अवसर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह दिवस हमें अपने आचार-विचार को परिष्कृत करते हुए धर्म, संस्कार और वैदिक परंपराओं के संरक्षण के प्रति दृढ़ संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
भव्य उपस्थिति और समापन
इस महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम में गुरूकुलम में अध्ययनरत सभी ब्राह्मण बटुकों के माता-पिता विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मीनारायण जी यादव, सचिव श्री भागीरथ यादव, बाबा साहब श्री बालकनाथ जी महाराज और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणजन भी इस आध्यात्मिक आयोजन के साक्षी बने। वैदिक मंत्रोच्चार, एक पवित्र धार्मिक वातावरण और गहरी श्रद्धा-भक्ति से परिपूर्ण इस आयोजन ने गुरूकुलम परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का समापन ब्राह्मण भोज और प्रसाद वितरण के साथ विधिवत रूप से हुआ।
यह आयोजन अपनी वैदिक परंपराओं, संस्कारों और धर्म के प्रति निष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।
