नरसिंहगढ़ में श्रावण मास पर पार्थिव शिव साधना का विशेष आयोजन
नरसिंहगढ़ के लक्ष्मीकांत मंदिर में 30 जुलाई से 27 अगस्त तक पार्थिव शिव साधना एवं शिवलिंग निर्माण का आयोजन हो रहा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 3 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में श्रावण मास के पावन अवसर पर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। नगर के प्रसिद्ध लक्ष्मीकांत मंदिर में 30 जुलाई से 27 अगस्त तक पार्थिव शिव साधना एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण का कार्यक्रम चल रहा है। इस दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएँ श्रद्धा और भक्ति के साथ मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हैं।
इस दिव्य आयोजन में पंडित प्रकाश शर्मा द्वारा प्रतिदिन शिव महिमा का प्रवचन और धार्मिक कथा का वाचन किया जा रहा है। प्रवचन सत्र के उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और आरती संपन्न कराई जाती है। मंदिर परिसर इस अनुष्ठान के कारण पूर्णतः भक्तिमय वातावरण में सराबोर है, जहाँ आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
भक्तिमय माहौल और श्रद्धालुओं की आस्था
श्रावण मास के इस विशेष आयोजन से लक्ष्मीकांत मंदिर परिसर में चारों ओर शिवमय वातावरण बना हुआ है। भगवान शिव के जयघोष, मधुर भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण पवित्र हो उठा है। श्रद्धालुओं की प्रतिदिन बढ़ती उपस्थिति आस्था और भक्ति की गहराई को दर्शाती है। भक्तगण भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उन्हें आध्यात्मिक शांति और ईश्वर के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण की परंपरा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है। मान्यता है कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर उसका अभिषेक करने से कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह अनुष्ठान महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, जो अपने परिवार के कल्याण हेतु श्रद्धापूर्वक इसमें भाग ले रही हैं।
लक्ष्मीकांत मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह आयोजन पिछले कई वर्षों से श्रावण मास में सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही महिलाओं की टोलियाँ मंदिर पहुँचकर अपने हाथों से मिट्टी का शिवलिंग बनाती हैं और फिर विधि-विधान से उनका पूजन-अर्चन करती हैं। पंडित प्रकाश शर्मा द्वारा सुनाई जा रही शिव कथा और प्रवचन श्रद्धालुओं को धार्मिक ज्ञान और प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
पार्थिव शिव साधना का महत्व
पार्थिव शिव साधना का विशेष महत्व है, खासकर श्रावण मास में। इस मास को भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। पार्थिव शिवलिंग का अर्थ है मिट्टी से निर्मित शिवलिंग। मान्यता है कि इस विधि से शिवलिंग बनाकर पूजा करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पंडित प्रकाश शर्मा ने प्रवचन के दौरान बताया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विधान अत्यंत सरल है, लेकिन इसकी महिमा अपरंपार है। मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसका अभिषेक रुद्राभिषेक मंत्रों के साथ करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिवलिंग निर्माण के लिए शुद्ध मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिसे विधि-विधान से गूंथकर शिवलिंग का आकार दिया जाता है। इसके पश्चात, विभिन्न प्रकार की सामग्रियों जैसे बेलपत्र, धतूरा, पुष्प आदि से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है। अभिषेक के लिए गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी आदि का प्रयोग होता है। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया अत्यंत पवित्रता और श्रद्धा के साथ की जाती है, जिससे वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।
श्रद्धापूर्वक की गई पार्थिव शिव साधना से न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुख-शांति आती है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलता है। सामूहिक रूप से आयोजित ऐसे धार्मिक अनुष्ठान लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने और सामुदायिक भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। नरसिंहगढ़ के लक्ष्मीकांत मंदिर में इस वर्ष का यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव साबित हो रहा है, जो आगामी 27 अगस्त तक चलेगा।
