नरसिंहगढ़ में संघ का भव्य पथ संचलन, राष्ट्र सेवा का संकल्प
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में नरसिंहगढ़ में चार बस्तियों से अनुशासित पथ संचलन निकाला गया। स्वयंसेवकों ने राष्ट्र सेवा और समर्पण...

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 21 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 101वें वर्ष और शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में देशभर में विशेष आयोजनों का गवाह बन रहा है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ नगर में एक भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसने स्थानीय नागरिकों के बीच राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का संदेश फैलाया। नगर की चार प्रमुख बस्तियों से स्वयंसेवकों ने इस अनुशासित मार्च में भाग लिया, जिसका नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
पथ संचलन हनुमानगढ़ी, बड़ा महादेव, जगदीश मंदिर और कंतोड़ा हनुमान मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों से शुरू हुआ। ये स्वयंसेवकों के समूह निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए पुरानी कोतवाली, नरसिंहगढ़ स्टेडियम और सूरजपोल बस्ती तक पहुंचे। कार्यक्रम का समापन ब्राह्मण धर्मशाला और जल मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर हुआ, जहाँ स्वयंसेवकों ने राष्ट्र के प्रति सेवा और समर्पण की भावना को पुनः दोहराया।
शताब्दी वर्ष: राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता का प्रतीक
वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 101 वर्षों की यात्रा में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता को अपने मूल सिद्धांतों के रूप में अपनाया है। शताब्दी वर्ष का यह आयोजन संघ के स्वयंसेवकों के लिए अपने देश के प्रति कर्तव्यबोध और सेवा भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान कर रहा है। नरसिंहगढ़ में आयोजित यह पथ संचलन केवल एक मार्च नहीं था, बल्कि यह सामाजिक एकता और संगठन की शक्ति का एक जीवंत प्रमाण था।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने संघ के उच्च आदर्शों और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' और 'सेवा सर्वोपरि' जैसे संदेशों को रेखांकित किया, जो संघ की कार्यप्रणाली के केंद्रीय स्तंभ हैं। शताब्दी वर्ष की विभिन्न गतिविधियों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को और अधिक मजबूत तथा व्यापक बनाना है। नरसिंहगढ़ में संपन्न हुआ यह आयोजन संघ की निरंतर सक्रियता और समाज के ताने-बाने में उसकी गहरी पैठ को दर्शाता है।
इस गौरवशाली यात्रा के 101वें वर्ष पर, राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित सभी स्वयंसेवकों और नागरिकों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं प्रेषित कीं और भविष्य में भी राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
