नरसिंहगढ़ में दुर्लभ 'रावण फल' का रोपण, जैव विविधता संरक्षण में नया कदम
नरसिंहगढ़ के अभय वनोद्यानम् में विजयादशमी पर दक्षिण अमेरिका की दुर्लभ 'रावण फल' प्रजाति का रोपण किया गया। यह मध्यप्रदेश में इस अनोखी फलदार प्रजाति...

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 22 अक्टूबर 2026
नरसिंहगढ़ में विजयादशमी के अवसर पर एक अनूठी पहल के तहत दक्षिण अमेरिका की दुर्लभ फलदार प्रजाति 'रावण फल' (Rollinia deliciosa) का पौधारोपण किया गया है। आई.आर.ई.-जंगल के तहत विकसित किए जा रहे अभय वनोद्यानम् में हुए इस रोपण को मध्यप्रदेश में इस विशिष्ट प्रजाति का पहला आधिकारिक प्रयास माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की जैव विविधता को समृद्ध करना और संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
संस्था के संस्थापक पुनीत उपाध्याय ने बताया कि इन रावण फल के पौधों को उनकी स्थानीय नर्सरी में विशेष रूप से बीज से तैयार किया गया है। यह रोपण 'बाह्य-स्थाने संरक्षण' (ex-situ conservation) की अवधारणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके तहत किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास से बाहर लाकर सुरक्षित किया जाता है।
'रावण फल' की विशिष्टता और अन्य फल प्रजातियाँ
रावण फल अपनी अनूठी बनावट के लिए पहचाना जाता है। इसके फल की सतह पर उभरे हुए नुकीले भाग इसे एक मुकुट जैसी आकृति देते हैं, जबकि इसके गूदे का स्वाद कस्टर्ड जैसा मलाईदार और सुगंधित होता है। नरसिंहगढ़ पहले से ही अपने सीताफल के लिए प्रसिद्ध है, और अब इस वनस्पति विरासत को और विस्तारित करने के उद्देश्य से रामफल, लक्ष्मण फल जैसी प्रजातियों के साथ रावण फल का भी संग्रह विकसित किया जा रहा है।
जैव विविधता और जन-जागरूकता का लक्ष्य
आई.आर.ई.-जंगल की इस पहल का लक्ष्य केवल वनस्पति विविधता को बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि दुर्लभ वनस्पतियों के अध्ययन, बीज संवर्धन और जैव विविधता के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। अभय वनोद्यानम् को भविष्य में पर्यटकों, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। संस्था का उद्देश्य इस वनोद्यान को एक शोध और पर्यावरण शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो पारंपरिक पर्वों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और भविष्य के लिए हरित विरासत तैयार करने के संकल्प से जोड़ता है।
