नरसिंहगढ़ में 'धरोहर': बच्चों और बुजुर्गों ने जीया ग्रामीण परिवेश
नरसिंहगढ़ में 'भंडारी किड्ज़' ने ग्रैंडपेरेंट्स डे पर 'धरोहर' कार्यक्रम आयोजित किया। बच्चों और बुजुर्गों ने ग्रामीण थीम पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं व बचपन की...

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 27 अक्टूबर 2026
नरसिंहगढ़ में चौबीस अक्टूबर को 'धरोहर' नामक एक अनूठे कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और उनके दादा-दादी व नाना-नानी ने ग्रामीण परिवेश की थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर अपने बचपन की सुखद स्मृतियों को फिर से जिया। यह आयोजन 'भंडारी किड्ज़' द्वारा ग्रैंडपेरेंट्स डे के उपलक्ष्य में संपन्न हुआ।
विद्यालय के डायरेक्टर चिन्मय भंडारी और प्रिंसिपल वैशाली भंडारी की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'गांव की थीम' रही। बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे ग्रामीण परिवेश के मंच पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें देखकर उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास किया गया।
पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न प्रकार के लोक नृत्यों और गीतों की प्रस्तुति दी, जो भारतीय ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत कर रहे थे। पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर था, बल्कि उनके अभिभावकों और दादा-दादी/नाना-नानी के लिए भी अपने बचपन के दिनों को याद करने का एक भावुक पल था। बच्चों ने मिट्टी के घर, चरखे, और अन्य ग्रामीण परिवेश के तत्वों का उपयोग करके मंच को जीवंत बना दिया, जिससे उपस्थित सभी लोगों को एक सुखद अहसास हुआ।
बुजुर्गों की भागीदारी और स्नेहिल पल
इस विशेष दिवस को और यादगार बनाने के लिए, विद्यालय ने दादा-दादी और नाना-नानी के लिए कई मनोरंजक खेलों का आयोजन किया। उत्साह से भरे इन खेलों में बुजुर्गों ने बड़ी सक्रियता से भाग लिया और अपने बचपन के दिनों की शरारतों व यादों को साझा करते हुए उन्हें फिर से जिया। इस दौरान माहौल अत्यंत उल्लासपूर्ण रहा। खेल जैसे 'रस्साकशी', 'अंताक्षरी' और 'चम्मच-नींबू दौड़' ने बुजुर्गों को विशेष रूप से उत्साहित किया, और उन्होंने बच्चों की तरह ही आनंद लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिवार में बुजुर्गों के अमूल्य योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना और नई पीढ़ी को पारिवारिक मूल्यों तथा अपनी संस्कृति के महत्व से अवगत कराना था। दादा-दादी और नाना-नानी द्वारा सुनाई गई कहानियों और गाए गए लोकगीतों ने नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं की गहराई से परिचित कराया। अंततः, यह आयोजन स्मरणीय और सफल रहा, जिसने पीढ़ी दर पीढ़ी के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया।
