नरसिंहगढ़ के अखाड़ा प्रमुख उस्ताद नन्नू सिंह कप्तान का निधन
नरसिंहगढ़ में मंदिर श्री जमात के अखाड़ा प्रमुख उस्ताद नन्नू सिंह कप्तान 'घान्दा बाबूजी' का आकस्मिक निधन हो गया। बुधवार सुबह 9 बजे निकलेगी अंतिम...

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 21 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में एक दुखद समाचार सामने आया है। मंदिर श्री जमात नरसिंहगढ़ के अखाड़ा प्रमुख और 'घान्दा बाबूजी' के नाम से लोकप्रिय उस्ताद श्री नन्नू सिंह कप्तान का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके देहावसान की खबर से स्थानीय धार्मिक और सामाजिक समुदायों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।
उस्ताद नन्नू सिंह कप्तान को पूज्य गुरुदेव महंत श्री नंदरामदास जी ख़ाकी का परम शिष्य माना जाता था। उन्होंने मंदिर श्री जमात की समृद्ध अखाड़ा परंपरा के संरक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने न केवल मंदिर की गतिविधियों का कुशलतापूर्वक संचालन किया, बल्कि भारतीय संस्कृति के अनुशासन और गुरु सेवा के आदर्शों को भी जीवंत रखा। उनके सौम्य व्यवहार और नेक व्यक्तित्व के कारण वे क्षेत्र भर में विशेष सम्मान के पात्र थे।
अखाड़ा परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति
मंदिर श्री जमात के महंत दीपेंद्र दास ख़ाकी ने उस्ताद नन्नू सिंह कप्तान के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह अखाड़ा परंपरा के लिए एक बड़ी और अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कप्तान बाबूजी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे गुरु सेवा के प्रति समर्पित थे और उन्होंने परंपरा को बनाए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके निधन से खाली हुई जगह को भरना अत्यंत कठिन होगा।
श्रद्धांजलि और अंतिम यात्रा का विवरण
स्थानीय विधायक श्री मोहन शर्मा और महंत दीपेंद्र दास ख़ाकी ने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। दोनों ने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे उन्हें इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। मंदिर श्री जमात से जुड़े श्रद्धालुओं और उनके अनगिनत शुभचिंतकों के बीच भी उनके जाने का गहरा दुःख व्याप्त है।
उस्ताद श्री नन्नू सिंह कप्तान 'घान्दा बाबूजी' की अंतिम संस्कार यात्रा बुधवार, 21 अक्टूबर को प्रातः 9:00 बजे उनके निवास स्थान, जो सिंचाई विभाग के सामने स्थित है, से प्रस्थान करेगी। यह यात्रा मुक्तिधाम के लिए आगे बढ़ेगी, जहाँ उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके अनुयायी और क्षेत्रवासी इस अंतिम पड़ाव में शामिल होकर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। अखाड़ा परंपरा के प्रति उनके समर्पण और उनकी स्मृतियों को सदैव याद रखा जाएगा। ॐ शांति।
