नरसिंहगढ़ करणी माता मंदिर में छप्पनभोग और जल सेवा का शुभारंभ
नरसिंहगढ़ के प्राचीन श्री करणी माता मंदिर में नवरात्रि की पंचमी पर छप्पनभोग महाआरती का आयोजन हुआ। करणी सेना परिवार ने शिवभक्तों के लिए शीतल...

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 16 अक्टूबर 2026
नरसिंहगढ़ स्थित प्राचीन श्री करणी माता मंदिर में नवरात्रि की पंचमी पर आदिशक्ति माँ करणी को छप्पनभोग अर्पित किए गए और महाआरती का आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन करणी सेना परिवार द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
15 अक्टूबर 2026 को शाम 6 बजे माँ करणी के श्री चरणों में छप्पनभोग समर्पित किए गए। इसके पश्चात शाम 7 बजे महाआरती हुई, जिसमें भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। महाआरती के बाद छप्पनभोग के प्रसाद को उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं और भक्तजनों में वितरित किया गया।
ऐतिहासिक मंदिर में भक्ति का संगम
यह प्राचीन श्री करणी माता मंदिर नरसिंहगढ़ की रियासतकालीन समय में वर्ष 1940 में श्रीमंत महाराज विक्रम सिंह जी द्वारा स्थापित किया गया था। इसे 'मालवा का कश्मीर' कहे जाने वाले नरसिंहगढ़ में स्थित विश्व के अत्यंत प्राचीन करणी माता मंदिरों में गिना जाता है। स्थानीय निवासियों के लिए यह मंदिर देशनोक के समान ही माँ करणी का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ भक्तजन बड़ी आस्था के साथ अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
जनसेवा हेतु शीतल जल सेवा का शुभारंभ
इस अवसर पर करणी सेना ने जनसेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए शीतल जल सेवा का शुभारंभ किया। पहले श्रावण मास के दौरान जल सेवा के लिए 20 पानी के कैंपर उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी, जिन्हें अब विधिवत रूप से सेवा कार्य में शामिल कर लिया गया है।
यह निशुल्क जल सेवा विभिन्न धार्मिक आयोजनों जैसे जुलूस, शोभायात्रा, शिव बारात, कावड़ यात्रा और पालकी में शामिल होने वाले शिवभक्तों एवं श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेगी। इसके अतिरिक्त, राजपूत समाज के विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भी इस सेवा का लाभ मिल सकेगा। जिला राजगढ़ की टीम जीवन सिंह शेरपुर के मार्गदर्शन में करणी सेना परिवार द्वारा यह लोक कल्याणकारी कार्य संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी और भीड़ के समय सुलभ शीतल जल उपलब्ध कराना है। मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में करणी सैनिकों और बड़ी संख्या में मातारानी के भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इसे सफल बनाया।
