नंदीग्राम उपचुनाव: TMC का खेल बिगड़ा, कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन वापसी के बाद TMC के खेल बिगड़ने के संकेत हैं। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | 18 सितंबर 2026
पश्चिम बंगाल की बहुचर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर 2026 के करीब आते ही राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। विशेष रूप से, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेल को बड़ा झटका लगा है, जब कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को हत्या के एक मामले में राज्य पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था। TMC की ओर से पहले संचिता प्रधान उम्मीदवार थीं, जिन्होंने बाद में अपना नामांकन वापस ले लिया। इस बदलाव के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की गई थी, लेकिन गिरफ्तारी ने इस समीकरण को अनिश्चितता में डाल दिया है।
चुनाव कार्यक्रम और प्रमुख दावेदार
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस सीट से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जो शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की माता हैं। भाजपा के चुनाव प्रभारी सांसद ज्योर्तिमय सिंह महतो ने 1,10,000 से अधिक वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
पृष्ठभूमि और पिछला चुनावी गणित
नंदीग्राम सीट तब खाली हुई थी जब मौजूदा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया था, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की नौबत आई। पिछले चुनाव में, शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के टिकट पर 1,27,301 वोट (50.56%) प्राप्त किए थे, जबकि TMC की पवित्रा कर को 1,17,636 वोट (46.72%) मिले थे। यह परिणाम दर्शाता है कि नंदीग्राम सीट पर मुकाबला कड़ा रहा है।
TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान का नामांकन वापस लेना और उसके बाद कांग्रेस को समर्थन देने का निर्णय, पार्टी की रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने इस पूरी योजना पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटनाक्रम का मतदाता और चुनाव परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
