ऑनलाइन दाखिल खारिज के विरोध में बलरामपुर में वकीलों का अनशन, ठप न्यायिक कार्य
बलरामपुर के उतरौला में ऑनलाइन दाखिल खारिज व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। इससे दीवानी और तहसील न्यायालय...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 14 अक्टूबर 2026
बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील में ऑनलाइन नामांतरण और दाखिल खारिज की नई व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है। विरोध प्रदर्शन के तहत आज 40 अधिवक्ताओं ने क्रमिक अनशन पर बैठकर अपनी मांगें दोहराईं। इस आंदोलन के कारण दीवानी और तहसील न्यायालयों में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 685 वादों की सुनवाई प्रभावित हुई है। न्यायिक कामकाज बाधित होने से वादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय रजिस्ट्री कार्यालय में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले सत्रह दिनों से यहाँ किसी भी प्रकार के दस्तावेज़ का पंजीकरण नहीं हो सका है। इससे संपत्ति की खरीद-फरोख्त करने वाले नागरिकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
वकीलों की मुख्य मांगें और विरोध प्रदर्शन
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने स्पष्ट किया है कि उनकी मुख्य मांग ऑनलाइन दाखिल खारिज प्रक्रिया को तत्काल समाप्त कर पुरानी व्यवस्था को पुनः लागू करने की है। वे इस मांग पर पूरी तरह अडिग हैं।
अपने विरोध को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए, अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर से एक विशाल बाइक रैली का आयोजन किया। यह रैली मुख्य बाज़ार के विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस तहसील परिसर में समाप्त हुई। इस दौरान वकीलों ने सरकार के विरुद्ध नारे लगाए और प्रशासन पर हठधर्मिता का आरोप लगाया।
नई व्यवस्था पर अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया
इस नई ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ताओं में तीव्र असंतोष है। पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र कुमार ने इस नई व्यवस्था को "काला कानून" करार दिया है। वहीं, एक अन्य पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा है कि जनता पर कोई भी नया नियम जबरन नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांग को पूरा नहीं करती, तब तक अधिवक्ताओं का आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
क्रमिक अनशन स्थल पर मो. खलील खान, देवेंद्र कुमार, राम चंद्र जायसवाल, सियाराम मिश्र, अलाउद्दीन खान, ओ. पी. सिंह, श्वेता सिंह और शमशाद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। प्रदर्शन में नसीम अहमद, अरविंद श्रीवास्तव, सतीश वर्मा, डी. एन. सिंह, आर. के. पांडेय और इज़हारुल हसन जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हुए। सरकार से अब इस पूरे मामले में एक ठोस समाधान निकालने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि आम जनता और कानूनी प्रक्रिया को हो रहे नुकसान को रोका जा सके।
