नाहरगढ़ जैविक उद्यान: बाघ 'शिवाजी' का हमला, एक महिला श्रमिक की मौत
जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में सुरक्षा चूक के चलते बाघ 'शिवाजी' ने एक महिला श्रमिक पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने 10 लाख रुपये की सहायता और परिवार को रोजगार देने की घोषणा की है।

द क्लिफ न्यूज़ | जयपुर | 3 सितंबर 2026
जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी के चलते बुधवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक बाघ ने घास काट रही महिला श्रमिकों के समूह पर हमला कर दिया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 42 वर्षीय महिला श्रमिक सुगना देवी की मौत हो गई। बाघ 'शिवाजी' द्वारा किए गए इस हमले ने जैविक उद्यान की सुरक्षा प्रोटोकॉल और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुगना देवी अपने अन्य महिला सहकर्मियों के साथ बाड़ा नंबर 16 में घास काटने का काम कर रही थीं। इसी दौरान, बाघ को रखने वाले होल्डिंग क्षेत्र का पिंजरा खोल दिया गया। श्रमिकों को इस बात की भनक तक नहीं थी कि बाघ को उसी बाड़े में छोड़ा जा रहा है। अचानक बाघ के सामने आने से महिलाओं में भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए वे इधर-उधर भागने लगीं, कुछ ने फेंसिंग पर चढ़कर बाहर निकलने का प्रयास किया, जबकि एक महिला ने पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। दुर्भाग्यवश, सुगना देवी बाघ की पकड़ से बच नहीं पाईं और उनकी वहीं मौत हो गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को नियंत्रित कर महिला के शव को कब्जे से मुक्त कराया।
सुरक्षा प्रोटोकॉल की घोर अनदेखी
इस घटना ने नाहरगढ़ जैविक उद्यान की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सामान्यतः, किसी भी रखरखाव या सफाई कार्य के लिए बाड़े में श्रमिकों के प्रवेश से पहले, बाघ को सुरक्षित होल्डिंग एरिया में स्थानांतरित किया जाता है और कर्मचारियों के बाड़े से पूरी तरह बाहर निकलने की पुष्टि की जाती है। उप वन संरक्षक आशीष व्यास ने बताया कि टाइगर एनक्लोजर के प्रभारी कर्मचारी हंसा ने बाघ को डिस्प्ले एरिया में ले जाने के लिए पिंजरा खोला था, लेकिन उस वक्त महिला श्रमिकों के बाड़े के भीतर होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। प्रथम दृष्टया, इसे ड्यूटी में घोर लापरवाही और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करने का मामला माना गया है। इस संबंध में संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच और विस्तृत पड़ताल शुरू
घटना की गंभीरता को देखते हुए, वन विभाग ने सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी को इस पूरे मामले की जांच सौंप दी है। जांच के दायरे में घटनाक्रम की पूरी कड़ियों को खंगालना, सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करना, निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन हुआ या नहीं, कर्मचारियों की भूमिका और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच शामिल है। पुलिस विभाग ने भी स्वतंत्र रूप से इस बात की पड़ताल शुरू कर दी है कि घटना के समय सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश, मुआवजे की मांग
सुगना देवी की हृदय विदारक मौत की खबर फैलते ही उनके पैतृक गांव से परिजन और ग्रामीण नाहरगढ़ जैविक उद्यान के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने पीड़ित परिवार के लिए पर्याप्त मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग को लेकर अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सुगना देवी परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य थीं और उनकी असमय मृत्यु से परिवार पर गहरा आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। स्थानीय विधायक और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
मुआवजा और पुनर्वास की घोषणा
वन विभाग ने मृतक सुगना देवी के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की तत्काल घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, परिवार के एक सदस्य को डेयरी बूथ आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी निर्णय लिया है कि परिवार के दो सदस्यों को संविदा आधार पर वन विभाग में रोजगार प्रदान किया जाएगा, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
जैविक उद्यान की सुरक्षा व्यवस्था होगी सुदृढ़
इस भयावह घटना के पश्चात्, नाहरगढ़ जैविक उद्यान की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा प्रारंभ कर दी गई है। वन विभाग ने संकेत दिया है कि सुरक्षा में जहां भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें अविलंब दूर कर व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। विशेष रूप से, वन्यजीवों के बाड़ों में कर्मचारियों के प्रवेश और निकासी के दौरान, साथ ही जानवरों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करते समय, बेहतर समन्वय और चेतावनी प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह घटना इस गंभीर प्रश्न को जन्म देती है कि जब पर्यटकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल मौजूद हैं, तो बाघ और महिला श्रमिकों का एक ही समय में एक ही क्षेत्र में उपस्थित होना कैसे संभव हुआ। जांच रिपोर्ट अंतिम रूप से आने के बाद ही लापरवाही के लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और उन पर की जाने वाली कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
