नगर परिषद कुरवाई में फर्जीवाड़े का आरोप: दोहरे वेतन और अवैध नियमितीकरण की शिकायत
RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर कुरवाई नगर परिषद पर शासकीय अभिलेखों में हेरफेर का आरोप लगा है। एक कर्मचारी पर एक साथ दो...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 29 जुलाई 2026
विदिशा जिले की नगर परिषद कुरवाई में शासकीय अभिलेखों में कथित हेरफेर कर एक कर्मचारी को लाभ पहुंचाने का गंभीर मामला सामने आया है। सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता आशुतोष शर्मा ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि एक व्यक्ति एक ही अवधि में स्वास्थ्य विभाग में एम्बुलेंस चालक के रूप में कार्यरत रहा, साथ ही नगर परिषद कुरवाई के दैनिक श्रमिक मस्टर रोल में भी दर्ज था। बाद में इसी आधार पर उसे फायरमैन जैसे पद पर नियमों का उल्लंघन कर विनियमित (स्थायी) कर दिया गया।
यह शिकायत मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजी गई है, जिसमें कूटरचना, फर्जी उपस्थिति, दोहरे वेतन भुगतान और अवैध विनियमितीकरण जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन अनियमितताओं से शासन को आर्थिक क्षति हुई है और इसमें तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है।
RTI दस्तावेजों से खुला दोहरे रोजगार का मामला
आशुतोष शर्मा ने अपने दावे के समर्थन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुरवाई के तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र का हवाला दिया है। इसके अनुसार, अफरोज खान पुत्र हमीद खान, निवासी कुरवाई, वर्ष 2004 से 2007 तक स्वास्थ्य विभाग में एम्बुलेंस चालक के पद पर नियमित रूप से कार्यरत थे।
हालांकि, इसी अवधि के दौरान नगर परिषद कुरवाई के दैनिक श्रमिक उपस्थिति मस्टर रोल में भी अफरोज खान का नाम दर्ज पाया गया है। RTI कार्यकर्ता का तर्क है कि एक ही व्यक्ति का एक ही समय में दो अलग-अलग सरकारी विभागों में पूर्णकालिक सेवा देना संभव नहीं है। इसलिए, नगर परिषद के रिकॉर्ड में दर्ज उनकी उपस्थिति की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसकी गहन जांच की मांग की गई है।
मस्टर रोल में हेरफेर का गंभीर आरोप
शिकायत में विशेष रूप से वर्ष 2006 और 2007 के नगर परिषद कुरवाई के उपस्थिति मस्टर रोल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आशुतोष शर्मा का दावा है कि इन मस्टर रोल में नामों की काट-छांट, ओवरराइटिंग और हस्ताक्षरों में भिन्नता स्पष्ट दिखाई देती है। उनका मानना है कि इन दस्तावेजों में सुनियोजित तरीके से बदलाव किए गए ताकि अफरोज खान को स्थाई कर्मचारी योजना का अनुचित लाभ मिल सके।
शिकायतकर्ता के अनुसार, नगर परिषद के अन्य श्रमिकों के उपस्थिति रिकॉर्ड की तुलना में केवल अफरोज खान से संबंधित प्रविष्टियों में ही ऐसे बदलाव पाए गए हैं। यह तथ्य मामले में सुनियोजित हेरफेर की ओर इशारा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
फायरमैन पद पर नियम विरुद्ध विनियमितीकरण
शिकायत के अनुसार, सामान्य दैनिक श्रमिक मस्टर रोल के आधार पर अफरोज खान को फायरमैन जैसे एक तकनीकी और महत्वपूर्ण पद पर विनियमित किया गया। यह प्रक्रिया शासन के नियमों के विरुद्ध बताई जा रही है। सामान्य नियमों के तहत, ऐसे विशिष्ट पदों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और चयन प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है।
RTI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन नियमों की घोर अनदेखी करते हुए किए गए इस विनियमितीकरण से न केवल स्थापित चयन प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ, बल्कि इससे शासन को आर्थिक नुकसान भी हुआ। इस अनियमित विनियमितीकरण की प्रक्रिया की पूरी जांच की मांग की गई है ताकि दोषियों का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका पर संदेह
इस कथित फर्जीवाड़े में नगर परिषद कुरवाई के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि पद का दुरुपयोग करते हुए शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर किया गया और संबंधित व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
शिकायतकर्ता ने इस मामले में 'आपसी मिलीभगत' की प्रबल आशंका व्यक्त की है। उनका कहना है कि इस प्रकार की अनियमितताओं को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक तंत्र के भीतर सहयोग आवश्यक है। इसलिए, इस पूरे मामले की जांच में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का विस्तार से पता लगाया जाना चाहिए।
अपर मुख्य सचिव से चार प्रमुख माँगें
RTI कार्यकर्ता आशुतोष शर्मा ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है:
- मामले की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए कर्मचारी के विनियमितीकरण की समीक्षा की जाए और नियमानुसार कार्रवाई हो।
- संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर एफआईआर की जाए।
- जांच में यदि शासकीय धन के दुरुपयोग या गलत भुगतान का मामला सामने आता है, तो उसकी तत्काल वसूली सुनिश्चित की जाए।
यह मामला फिलहाल शिकायत और RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उठाया गया है। आरोपों की अंतिम सत्यता केवल एक गहन और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। नगर परिषद कुरवाई और संबंधित अधिकारियों के पक्ष को जानने के बाद ही स्थिति का पूर्ण आकलन संभव होगा। शासकीय संस्थानों में नियुक्ति, उपस्थिति और वेतन भुगतान जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
