नाबालिग की हत्या: मां और प्रेमी गिरफ्तार, बदनामी के डर से किया था कत्ल
भिंड के लहार थाना क्षेत्र में 6 वर्षीय बालिका की क्षत-विक्षत लाश मिलने के मामले में पुलिस ने उसकी मां और प्रेमी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बदनामी के डर से गला घोंटकर हत्या को अंजाम दिया था।

द क्लिफ न्यूज़ | भिंड | 16 अगस्त 2026
भिंड जिले के लहार थाना क्षेत्र में ग्राम मेहरा बुजुर्ग के पास कुएं में एक 6 वर्षीय बालिका का क्षत-विक्षत शव मिलने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस अंधे कत्ल के पीछे किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं, बल्कि मासूम की अपनी मां और उसके प्रेमी का हाथ पाया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें जेल भेज दिया है।
यह घटना तब प्रकाश में आई जब ग्राम मेहरा बुजुर्ग के कोटवार मेघ सिंह परिहार ने मोहन दोहरे नामक व्यक्ति के पानी से भरे कुएं में एक अज्ञात शव पड़े होने की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकाला। अत्यधिक क्षत-विक्षत अवस्था में मिले इस शव में कीड़े पड़ चुके थे, जिससे अनुमान लगाया गया कि यह लगभग 5 से 7 दिन पुराना हो सकता है। शव की पहचान के लिए उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की गईं। बाद में डायटम टेस्ट रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि बालिका की हत्या करने के बाद शव को कुएं में फेंका गया था।
तकनीकी जांच में सामने आए संदिग्ध
मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप पटेल और एसडीओपी लहार प्रवीण त्रिपाठी के मार्गदर्शन में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। इस दल का नेतृत्व लहार थाना प्रभारी उप पुलिस अधीक्षक शिव सिंह यादव और उप निरीक्षक नरेंद्र शर्मा ने किया। जांच के दौरान, पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, जिसमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल टावर लोकेशन शामिल थे, का गहन विश्लेषण किया। इस तकनीकी जांच ने मृतका की मां और उसके प्रेमी को संदिग्धों की सूची में ला दिया। पुलिस ने यह भी पाया कि बच्ची के लापता होने के बावजूद मां की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। घटना के दिन से ही दोनों आरोपी फरार थे और पुलिस से बचने के लिए वे राहगीरों के फोन से परिजनों से संपर्क साध रहे थे, ताकि उनके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस न हो सके।
बदनामी का डर बना हत्या का कारण
मुखबिर से मिली एक सटीक सूचना के आधार पर, लहार पुलिस की टीम ने 15 अगस्त 2026 को ग्वालियर से दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन जब पुलिस ने दोनों से अलग-अलग कड़ाई से पूछताछ की, तो वे अपना जुर्म कबूल करने लगे।
आरोपियों ने खुलासा किया कि 6 जुलाई 2026 की रात को, बालिका अपने नाना के घर ग्राम मेहरी जाने की जिद कर रही थी। मां और प्रेमी को डर था कि यदि बच्ची अपने नाना के घर गई, तो वह उनके प्रेम संबंध और अनैतिक हरकतों के बारे में सबको बता देगी, जिससे गांव में उनकी बदनामी हो जाएगी। इसी डर ने उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
अपने इस भयानक कृत्य को अंजाम देने के लिए, उन्होंने बच्ची को नाना के घर छोड़ने के बहाने साथ ले लिया। रात करीब 9-10 बजे, वे उसे पिंटू ठाकुर के खेत की कोठी से मोहन दोहरे के कुएं के पास ले गए। वहां, प्रेमी ने बालिका का गला घोंट दिया, जबकि उसकी मां ने उसके हाथ-पैर पकड़ लिए। मासूम की सांसें थमने के बाद, दोनों ने शव को उसके कपड़ों और चप्पलों सहित कुएं में फेंक दिया और उसी रात गांव से फरार हो गए।
पुलिस टीम को मिलेगा पुरस्कार
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरी घटना की वीडियोग्राफी भी कराई। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1), 238(बी), 3(5) के तहत अपराध क्रमांक 163/26 दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इस अंधे कत्ल के मामले का सफलतापूर्वक पर्दाफाश करने वाली लहार पुलिस और साइबर सेल की टीम के सदस्यों, जिनमें उप निरीक्षक नरेंद्र शर्मा, उप निरीक्षक मुन्शी लाल डोंगर, उप निरीक्षक गीता सिकरवार, साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक सत्यवीर सिंह और अन्य आरक्षक शामिल हैं, की एसपी सूरज कुमार वर्मा ने विशेष सराहना की है। उन्होंने इस उत्कृष्ट कार्य के लिए पूरी टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
