मूंग खरीदी नीति के विरोध में किसान भोपाल की ओर कूच, सीएम निवास घेरने का ऐलान
मध्यप्रदेश सरकार की मूंग खरीद नीति के खिलाफ 13 किसान संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। किसानों ने भोपाल कूच कर बुधवार को मुख्यमंत्री निवास घेरने की घोषणा की है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 28 जुलाई 2026
मध्यप्रदेश सरकार की नई मूंग खरीद नीति के विरोध में किसानों का आंदोलन सोमवार को राजधानी भोपाल की ओर बढ़ चला, जहाँ उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास को घेरने का ऐलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा सहित 13 किसान संगठनों द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में प्रदेशभर से हजारों किसान शामिल हुए। प्रशासन द्वारा रोके जाने के प्रयासों के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग को पार करते हुए अपनी आगे की यात्रा जारी रखी। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच मामूली धक्का-मुक्की भी हुई।
किसानों का मुख्य आरोप है कि सरकार की '25 प्रतिशत खरीद नीति' किसानों के हितों के विरुद्ध है। संगठनों का कहना है कि इस नीति के कारण बड़ी मात्रा में किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं बिक पाएगी, और उन्हें मजबूरी में खुले बाजार में कम दाम पर अपनी फसल बेचनी पड़ेगी। यह स्थिति उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाएगी। इसके अतिरिक्त, किसानों ने खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और खरीफ सीजन के लिए प्रभावी ई-टोकन प्रणाली लागू करने की भी मांग की है, क्योंकि उनका दावा है कि वर्तमान व्यवस्था से उन्हें समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
नर्मदापुरम से शुरू हुआ आंदोलन, जगह-जगह अवरोध
किसानों का यह आंदोलन सोमवार सुबह नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू हुआ। यहाँ विभिन्न किसान संगठनों, जिनमें क्रांतिकारी किसान संगठन, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू), राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ और किसान कांग्रेस शामिल हैं, के प्रतिनिधियों ने एकत्रित होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। आंदोलन की शुरुआत माँ नर्मदा के पूजन और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ हुई, जिसके उपरांत हाथों में झंडे और बैनर लिए किसान भोपाल की ओर पैदल मार्च करने लगे।
किसानों को रोकने के उद्देश्य से, प्रशासन ने हरदा, भैरुंदा और भोपाल की ओर जाने वाले अन्य प्रमुख मार्गों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। कई किसान नेताओं को एहतियातन अस्थायी रूप से नजरबंद भी किया गया। झंडा चौक, इंदिरा चौक और भोपाल तिराहे जैसे स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग की गई थी। इन अवरोधों का सामना करते हुए, किसानों ने कई जगहों पर बैरिकेड हटाकर अपना प्रदर्शन जारी रखा। इस दौरान, कलेक्टर सोमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस. थोटा ने किसानों से संवाद स्थापित कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, परंतु यह वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुँच सकी।
बैरिकेडिंग पार कर भोपाल की ओर बढ़े किसान
पहली बैरिकेडिंग को पार करने के बाद, किसान नर्मदा ब्रिज के पास ग्राम डोगरवाड़ा पहुंचे, जहाँ प्रशासन ने तीन-स्तरीय बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। यहाँ भी किसानों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखी गई। संभाग आयुक्त श्रीकांत बनोठ ने भी किसानों से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन यह प्रयास भी निष्फल रहा। शाम लगभग 7:15 बजे, आंदोलनकारियों का समूह बुधनी ओवरब्रिज पर पहुँचा, जहाँ पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतज़ाम कर रखे थे। लगभग 15 से 20 मिनट के तनावपूर्ण गतिरोध के बाद, किसानों ने यहाँ भी बैरिकेड हटाकर भोपाल की ओर अपनी यात्रा जारी रखी।
प्रशासन की ओर से की गई इन तैयारियों के बावजूद, किसानों का जोश कम नहीं हुआ। वे विभिन्न रास्तों से होते हुए और छोटे-छोटे समूहों में बंटकर आगे बढ़ने में सफल रहे, जिससे पुलिस के लिए उन्हें पूरी तरह से रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। कई किसानों का यह भी कहना था कि सरकार की नीति उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में विफल साबित हो रही है, और इस बार वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
किसानों की प्रमुख माँगें और भविष्य की रणनीति
किसानों की मुख्य मांगों में शामिल हैं: न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी, प्रति एकड़ खरीद सीमा में वृद्धि, और खाद वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मूंग खरीद नीति में संशोधन नहीं करती और उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बुधवार को प्रस्तावित भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव के कार्यक्रम की पुष्टि की है, और कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।
किसानों का यह भी आरोप है कि ई-टोकन व्यवस्था, जिसका उद्देश्य खाद वितरण को सुव्यवस्थित करना था, व्यवहार में पूरी तरह से अप्रभावी साबित हुई है। इसके कारण उन्हें खरीफ सीजन के लिए आवश्यक खाद प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो सीधे तौर पर उनकी खेती को प्रभावित कर रहा है। इस मुद्दे पर भी किसानों ने तत्काल समाधान की मांग की है।
वहीं, दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं और किसानों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने का प्रयास जारी है। यह कहना है कि सरकार किसानों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। बुधवार को होने वाले मुख्यमंत्री निवास घेराव को लेकर अब सभी की निगाहें सरकार की अगली रणनीति और किसानों के आंदोलन की दिशा पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या फिर आंदोलन और उग्र रूप धारण करता है।
