मुंबई में गांधीवादी नेताओं की भेंट: विश्व शांति के लिए अहिंसा का संकल्प
मुंबई में अन्ना हजारे और डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. की ऐतिहासिक मुलाकात हुई, जिसमें वैश्विक युद्धों पर चिंता जताते हुए अहिंसा को बढ़ावा देने का...

mumbai | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | मुंबई | 13 सितंबर 2026
मुंबई में देश के दो प्रतिष्ठित गांधीवादी समाजसेवियों, अन्ना हजारे और महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के अध्यक्ष डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. के बीच एक महत्वपूर्ण भेंटवार्ता हुई। वैश्विक शांति, अहिंसा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने दुनिया भर में फैल रहे युद्धों, हिंसक संघर्षों और नफरत पर गहरी चिंता व्यक्त की। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां अनेक राष्ट्र युद्ध की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, इस भेंट को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस संवाद के दौरान, दोनों समाजसेवियों ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को आधुनिक हथियारों की प्रतिस्पर्धा के बजाय महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्य, प्रेम और मानवीय करुणा के मार्ग की आवश्यकता है। डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने अन्ना हजारे को एक महान समाजसेवक बताते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने अन्ना हजारे के जनसेवा और गांधीवादी मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण को एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। इसके प्रत्युत्तर में, अन्ना हजारे ने भी डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. के प्रति अपना स्नेह और सम्मान प्रकट किया। उन्होंने कमजोर वर्गों, आदिवासियों और वंचितों के लिए डॉ. राजगोपाल द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और उन्हें 'पदयात्रा गांधी' कहकर संबोधित किया।
अहिंसा के प्रसार हेतु एकजुटता का आह्वान
वर्तमान वैश्विक अशांति के बीच, दोनों गांधीवादी विचारकों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि विश्व को शांति और सद्भाव की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध और हिंसा मानवता के लिए एक बड़ा खतरा हैं और इनसे निपटने का एकमात्र प्रभावी तरीका महात्मा गांधी द्वारा सिखाए गए अहिंसा के मार्ग को अपनाना है। डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने कहा, "हथियारों की होड़ और कूटनीतिक विफलताएं हमें विनाश की ओर ले जा रही हैं। ऐसे समय में, हमें गांधी की शांति और सत्य की शिक्षाओं को विश्व स्तर पर एक शक्तिशाली अभियान के रूप में प्रचारित करना होगा।" उन्होंने अन्ना हजारे जैसे जन-जन से जुड़े नेताओं के साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
अन्ना हजारे ने इस विचार का पुरजोर समर्थन किया और कहा कि वे हमेशा अहिंसक आंदोलन के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, "जनता की शक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है। यदि हम लोगों को अहिंसा के महत्व और शांतिपूर्ण तरीकों से समस्याओं को हल करने की क्षमता के बारे में शिक्षित कर सकें, तो हम निश्चित रूप से दुनिया को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि नफरत और विभाजन के बीज बोने वाली ताकतों का मुकाबला प्रेम और करुणा से ही किया जा सकता है।
चंबल के आत्मसमर्पण की ऐतिहासिक घटना का स्मरण
हाल ही में अस्वस्थता से उबरकर घर लौटे अन्ना हजारे, चिकित्सकों की सलाह पर मिलने वालों से परहेज कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. के लिए विशेष अनुमति देते हुए उनसे व्यक्तिगत मुलाकात की। बातचीत के दौरान जब जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम और चंबल के ऐतिहासिक दस्यु आत्मसमर्पण का प्रसंग उठा, तो अन्ना हजारे भावुक हो गए। उन्होंने 14 अप्रैल 1972 की उस घटना को हिंसा से अहिंसा की ओर परिवर्तन का एक अनूठा उदाहरण बताते हुए चंबल को विश्व शांति का केंद्र बनाने के प्रयासों को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।
यह ऐतिहासिक घटना, जिसमें चंबल के सैकड़ों डकैतों ने आत्मसमर्पण किया था, गांधीवादी विचारधारा की शक्ति का एक प्रमाण थी। डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने इस घटना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "यह क्षण दर्शाता है कि कैसे प्रेम, करुणा और दृढ़ संकल्प से हिंसक प्रवृत्तियों को भी शांति के मार्ग पर लाया जा सकता है।" अन्ना हजारे ने चंबल में शांति स्थापित करने और समाज के हाशिए पर पड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए महात्मा गांधी सेवा आश्रम द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अनुभव अन्य संघर्ष क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनेगा।
भविष्य में संयुक्त प्रयासों का संकल्प
डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने इस अवसर पर अन्ना हजारे को अगले वर्ष जौरा में आयोजित होने वाले दस्यु आत्मसमर्पण दिवस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। अन्ना हजारे ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि यदि उनका स्वास्थ्य अनुकूल रहा, तो वे निश्चित रूप से जौरा आएंगे। यह यात्रा न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर शांति और अहिंसा के संदेश को फैलाने में सहायक होगी।
भेंट के समापन पर, अन्ना हजारे ने अपनी दो पुस्तकें, 'मेरा गांव मेरा तीर्थ' और 'अनुभव के बोल', डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. को भेंट कीं। इन पुस्तकों में उनके जीवन के अनुभव और सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता झलकती है। उन्होंने आश्रम के कार्यकर्ताओं को अपना आशीर्वाद देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे मार्गदर्शन के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जो पहले से ही गांधीवादी मूल्यों का केंद्र है, भविष्य में शांति और सामाजिक न्याय के लिए और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह मुलाकात गांधीवादी विचारधारा को एक नए वैश्विक अभियान के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दोनों दिग्गजों ने भविष्य में मिलकर शांति और मानवीय समरसता की स्थापना के लिए ठोस प्रयासों का संकल्प लिया है। यह भेंट वैश्विक शांति और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरक पहल साबित होगी, विशेषकर ऐसे समय में जब दुनिया युद्ध की भयावहता का सामना कर रही है। दोनों ने मिलकर एक ऐसी विश्व व्यवस्था की वकालत की जो हथियारों की नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों की शक्ति पर आधारित हो।
