मुंबई: कुर्ला में भूस्खलन, घरों पर गिरा मलबा; 30 साल की निवासी ने बताई खौफनाक आपबीती
मुंबई के कुर्ला में भारी बारिश के बीच तड़के भूस्खलन से गौसिया चॉल में अफरा-तफरी मच गई। मलबा गिरने से कई घर मलबे में तब्दील हो गए। 30 साल से वहां रह रहीं सायरा बानो ने बताया कि ऐसा मंजर कभी नहीं देखा।

द क्लिफ न्यूज़ | मुंबई | 12 अगस्त 2026
मुंबई के कुर्ला पश्चिम में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बुधवार तड़के एक भीषण भूस्खलन की घटना ने स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया। चिराग नगर स्थित गौसिया चॉल में लगभग 3:30 बजे पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे भारी मलबा नीचे स्थित घरों पर आ गिरा। इस विनाशकारी घटना ने इलाके में दहशत और मातम का माहौल पैदा कर दिया, जिसमें कई लोग मलबे के नीचे दब गए।
घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नींद से जागे लोगों ने 'पहाड़ गिर गया, भागो-भागो' की आवाज़ें सुनीं, जिसके बाद चारों ओर भगदड़ मच गई। स्थानीय निवासी अहमद हुसैन अंसारी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कोई झगड़ा हो रहा है, लेकिन बाहर निकलने पर उन्होंने मंजर की भयावहता देखी। पहाड़ी का एक हिस्सा ढह चुका था और मलबा तेजी से आसपास के घरों की ओर बढ़ रहा था, जिससे कुछ ही पलों में शांत बस्ती चीख-पुकार में बदल गई।
30 साल के अनुभव के बावजूद अभूतपूर्व त्रासदी
इस हादसे में मलबे से सुरक्षित निकाली गईं सायरा बानो, जो पिछले 30 वर्षों से इस इलाके में रह रही हैं, ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि घटना के समय उनका पूरा परिवार घर के अंदर सो रहा था। अचानक पहाड़ का हिस्सा ढह गया और कुछ ही क्षणों में उनका घर मलबे में तब्दील हो गया, जिसमें परिवार के सदस्य फंस गए। सायरा ने कहा कि उन्होंने अपने इतने लंबे जीवनकाल में ऐसी भयावह घटना कभी नहीं देखी। कुछ ही पलों में वर्षों की जमा-पूंजी और उनका घर मलबे में समा गया।
सायरा बानो ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि इस घटना के बाद उसी स्थान पर रहना बेहद मुश्किल और असुरक्षित हो गया है, और प्रशासन को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने इस अनुभव की भयावहता को शब्दों में बयां करते हुए कहा कि ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
राहत और बचाव कार्यों की चुनौतियां
घटना की सूचना मिलते ही मुंबई की राहत और बचाव एजेंसियां तुरंत हरकत में आईं। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने भी बचाव दलों के साथ मिलकर राहत कार्यों में सक्रिय रूप से सहयोग किया। हालांकि, लगातार हो रही भारी बारिश ने बचाव अभियान में गंभीर चुनौतियां पेश कीं, जिससे कार्य की गति धीमी पड़ गई।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। मलबे को हटाने तथा किसी भी संभावित रूप से फंसे हुए व्यक्ति की तलाश जारी रखने के लिए बचाव कार्य अथक रूप से जारी रखे गए। भारी बारिश के बीच, जहाँ एक ओर बचाव दल मलबे को हटाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर भूस्खलन के और अधिक होने का खतरा भी बना हुआ था, जिससे बचाव कार्य अधिक जोखिम भरा हो गया था।
महापौर ने किया चार लाख के मुआवजे का ऐलान
हादसे की गंभीरता को देखते हुए, मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने स्वयं गौसिया चॉल पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। महापौर ने घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, हादसे में घायल हुए लोगों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव राहत उपलब्ध कराने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
महापौर के दौरे और मुआवजे की घोषणा के बावजूद, प्रभावितों की मुख्य चिंता तत्काल सुरक्षित आश्रय की है। उनके लिए, इस घटना ने सिर्फ उनके घरों को नहीं छीना, बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा पर भी एक गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
पहाड़ी इलाकों में बढ़ता भूस्खलन का खतरा
मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों और कमजोर संरचनाओं वाले इलाकों में भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। कुर्ला की यह घटना एक बार फिर घनी आबादी वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिन परिवारों की नींद सामान्य बारिश के बीच खुली थी, उन्होंने कुछ ही मिनटों में अपने आसपास तबाही का मंजर देखा।
सायरा बानो और अन्य प्रभावित परिवारों की कहानी इस हादसे के दर्द और अनिश्चितता को उजागर करती है। तीन दशक से जिसे उन्होंने अपना घर माना, वहीं एक पल में पहाड़ का मलबा मौत और बेबसी का कारण बन गया। अब इन प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित ठिकाना प्राप्त करना है। भारी बारिश के बीच हुए इस हादसे ने मुंबई के पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और आपदा-प्रबंधन की तैयारियों को लेकर एक बार फिर व्यापक चिंताएं पैदा की हैं।
यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन में सुधार की कितनी आवश्यकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। सरकारी एजेंसियों को न केवल त्वरित राहत प्रदान करनी चाहिए, बल्कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए दीर्घकालिक समाधानों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
