मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, विपक्षी दल राष्ट्रपति से मिले
INDIA गठबंधन के 10 विपक्षी नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026
INDIA (इंडिया) गठबंधन के 10 प्रमुख विपक्षी नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावों में कथित वोट चोरी से जुड़े गंभीर मुद्दों पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित किया।
राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख नेता शामिल थे। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, तथा सांसद मनोज झा, एमए बेबी, डी. राजा, राजीव राय और सुप्रिया सुले जैसे गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
मतदाता सूची की निष्पक्षता पर उठाए गए सवाल
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद, राहुल गांधी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उनकी मुख्य चिंताओं को रेखांकित किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठाए गए सवालों पर जोर दिया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, जिनका तत्काल समाधान आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा
राहुल गांधी ने आगे घोषणा की कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगा। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि वह चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।
इस घटनाक्रम के चलते चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
