मध्य प्रदेश के रियल एस्टेट नक्शे में बदलाव: भोपाल से उज्जैन की ओर खिसकते प्रोजेक्ट, MPRERA रिपोर्ट ने खोले संकेत
मध्य प्रदेश में शहरीकरण की दिशा और सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ताज़ा आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि राज्य...
मध्य प्रदेश में शहरीकरण की दिशा और सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ताज़ा आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि राज्य की राजधानी भोपाल से रियल एस्टेट गतिविधियां धीरे-धीरे उज्जैन की ओर शिफ्ट हो रही हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में बीते दो वर्षों में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की संख्या दोगुनी हो गई है और 2024-25 में यह शहर परियोजना पंजीकरण के मामले में भोपाल से आगे निकल गया है।
MPRERA रिपोर्ट से क्या सामने आया?
मध्य प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MPRERA) की रिपोर्ट के अनुसार:
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2000 से 2021 तक इंदौर राज्य में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पंजीकरण में शीर्ष पर रहा
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इस अवधि में भोपाल दूसरे स्थान पर बना रहा
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लेकिन 2024-25 में तस्वीर बदल गई—
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इंदौर पहले स्थान पर कायम रहा
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उज्जैन दूसरे और भोपाल तीसरे स्थान पर खिसक गया
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रिपोर्ट बताती है कि 2020-21 से 2023-24 तक हर साल भोपाल में उज्जैन की तुलना में लगभग दोगुने प्रोजेक्ट दर्ज हो रहे थे, लेकिन 2024-25 में उज्जैन ने राजधानी को पीछे छोड़ दिया।
बिल्डरों का आरोप: योजनाबद्ध उपेक्षा
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े संगठनों का मानना है कि यह बदलाव केवल बाजार का स्वाभाविक रुझान नहीं है।
क्रेडाई भोपाल (CREDAI Bhopal) के अध्यक्ष मनोज मीख का कहना है कि भोपाल में नए प्रोजेक्ट न आने की सबसे बड़ी वजह पिछले 20 वर्षों से मास्टर प्लान का अपडेट न होना है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि:
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भोपाल में RERA के तहत प्रोजेक्ट पंजीकरण लगातार जटिल होता जा रहा है
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यह राजधानी के विकास को धीमा करने की “सुनियोजित कोशिश” जैसा प्रतीत होता है
उज्जैन को बढ़त क्यों?
बिल्डरों के अनुसार उज्जैन में रियल एस्टेट बूम के पीछे दो बड़े कारण हैं:
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सिंहस्थ कुंभ 2028 को लेकर बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की उम्मीद
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मुख्यमंत्री मोहन यादव का उज्जैन से होना, जिससे प्रशासनिक फोकस और परियोजनाओं को गति मिलने की धारणा
इसी तरह का रुझान पहले भी देखा गया है—
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कांग्रेस शासन के दौरान कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में रियल एस्टेट गतिविधियां तेज़ हुई थीं
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पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में विदिशा में शहरी विकास ने रफ्तार पकड़ी थी
राज्य के कई जिले अब भी हाशिये पर
रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि 22 जिलों में 2024-25 के दौरान 10 से भी कम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट दर्ज हुए।
इनमें हारदा, शाजापुर, राजगढ़, दमोह, नरसिंहपुर, कटनी, रायसेन, ग्वालियर, छिंदवाड़ा नहीं बल्कि भिंड, पन्ना, रीवा और डिंडोरी जैसे जिले शामिल हैं, जहां केवल 1–2 प्रोजेक्ट ही पंजीकृत हुए।
बड़ा सवाल: संतुलित विकास या क्षेत्रीय झुकाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट गतिविधियों का किसी एक शहर की ओर झुकाव न सिर्फ आर्थिक असंतुलन पैदा करता है, बल्कि राजधानी जैसे शहर की विकास क्षमता पर भी असर डालता है। अगर भोपाल में नियोजन और मंजूरी प्रक्रियाएं समय पर दुरुस्त नहीं की गईं, तो यह ट्रेंड आगे और गहराने की आशंका है।
