MP पुलिस की CID ने 3 दिवसीय फॉरेंसिक और डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न की
भोपाल में CID द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक और डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें पुलिस अधिकारियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों और साक्ष्य प्रस्तुतीकरण पर प्रशिक्षित किया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 3 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय, भोपाल में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक एवं पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों को अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, साक्ष्यों के संकलन तथा उनके न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
समापन सत्र के अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी), श्री पंकज श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती जा रही है। ऐसे परिदृश्य में, विवेचना को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सुदृढ़ करना एक अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में अनुसंधान अधिकारी को किस प्रकार दक्षतापूर्वक कार्य संपादित करना चाहिए और विभाग द्वारा प्रदान किए गए अत्याधुनिक उपकरणों का अधिक से अधिक व्यावहारिक उपयोग कैसे किया जाए।
डीएनए और डिजिटल साक्ष्य पर विशेष सत्र
श्री श्रीवास्तव ने डीएनए और डिजिटल साक्ष्य संकलन के संबंध में एक विस्तृत और इंटरेक्टिव सत्र का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के साथ सीधे संवाद करते हुए उनके प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने सीआईडी में पदस्थापना के दौरान कर्मचारियों को अपने व्यावसायिक स्तर को निरंतर ऊंचा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनकी व्यावसायिक दक्षता में वृद्धि हो और वे पीड़ितों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। श्री श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान और तकनीकी दक्षता का अपने-अपने क्षेत्राधिकार में समुचित उपयोग करें, जिससे विवेचना की गुणवत्ता में सुधार हो और न्यायालयों में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्य अधिक सुदृढ़ एवं प्रामाणिक बन सकें। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए आयोजक टीम, विशेषज्ञ वक्ताओं और प्रतिभागियों को बधाई दी।
अपराध स्थल की फोटोग्राफी और साक्ष्य प्रस्तुतीकरण
कार्यशाला के दौरान, उप पुलिस अधीक्षक (फोटो), अपराध अनुसंधान विभाग, भोपाल श्री अमिताभ तिवारी और निरीक्षक श्री जाम सिंह ने अपराध घटनास्थल की फोटोग्राफी के तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं पर गहन जानकारी प्रदान की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपराधस्थल की फोटोग्राफी विवेचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा है। साक्ष्यों को उनकी मूल स्थिति में, व्यवस्थित क्रम (Overall, Mid-range और Close-up Photography) में तथा बिना किसी छेड़छाड़ के दस्तावेजीकृत किया जाना आवश्यक है। सत्र में अपराधस्थल की वीडियोग्राफी, मृत शरीर, अस्त्र-शस्त्र, रक्त के धब्बे, पद-चिन्ह और अन्य भौतिक साक्ष्यों के फोटोग्राफिक साक्ष्यीकरण की मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) पर विस्तृत चर्चा की गई।
न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया
श्री तिवारी ने फोटोग्राफिक साक्ष्यों के न्यायालयीन प्रमाणीकरण (Court Authentication) की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। इसमें फोटोग्राफ की चेन ऑफ कस्टडी (Chain of Custody) बनाए रखना, समय-दिनांक एवं जियो-लोकेशन का उल्लेख करना, तथा न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुतीकरण के दौरान बरती जाने वाली विधिक सावधानियों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में साक्ष्यों की प्रामाणिकता बनाए रखने के तकनीकी उपायों पर भी चर्चा की, ताकि विवेचना अधिकारी न्यायालय में मजबूती से साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें।
प्रशिक्षणार्थी फीडबैक और भविष्य की दिशा
कार्यशाला के अंतिम सत्र में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों, विषय-वस्तु और व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में बहुमूल्य फीडबैक लिया गया। समापन कार्यक्रम में पुलिस उप महानिरीक्षक श्री साकेत पाण्डेय, श्री प्रशांत खरे, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री मनीष खत्री के अतिरिक्त एफएसएल (FSL), डॉक्यूमेंट, फिंगरप्रिंट, कम्प्यूटर्स एवं फोटो शाखा के विषय-विशेषज्ञ और सभी प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रभावी पुलिसिंग का आधार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी एवं व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाना और अपराध अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों के अधिक प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा है। कार्यशाला के सफल समापन से प्रतिभागियों को अपराध घटना स्थल के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफिक साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण तथा न्यायालयीन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक, तकनीक आधारित और साक्ष्य-केंद्रित बनाने की दिशा में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसिंग की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की प्रभावशीलता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
