MP पुलिस CID की कार्यशाला: फॉरेंसिक, डिजिटल जांच में विशेषज्ञों ने सिखाया हुनर
भोपाल में 3 दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का दूसरा दिन, जिसमें विशेषज्ञों ने डीएनए, बैलिस्टिक्स और क्राइम सीन प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 2 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का दूसरा दिन विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक सत्रों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यशाला भोपाल में आयोजित की जा रही है और इसका उद्देश्य अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक तथा पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाना है। विशेष पुलिस महानिदेशक श्री पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन में यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पुलिस उप महानिरीक्षक श्री साकेत पाण्डेय, श्री प्रशांत खरे और सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री मनीष खत्री का मार्गदर्शन प्राप्त है।
कार्यशाला के दूसरे दिन, राज्य की क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने प्रतिभागियों को गहन व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इन सत्रों में अपराध जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया, जिससे पुलिस अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाया जा सके।
फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस साक्ष्य प्रबंधन
भोपाल स्थित क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL) की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस साक्ष्य प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन, संरक्षण और प्रयोगशाला तक पहुँचाने की मानक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। इस सत्र में ध्वनि नमूनों के विश्लेषण और प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला गया, जो डिजिटल युग में अपराधों की विवेचना का एक अहम हिस्सा है।
रासायनिक और विष विज्ञान संबंधी साक्ष्यों का प्रबंधन
आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों और विषाक्त पदार्थों के संकलन तथा रखरखाव की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधिक साक्ष्य के रूप में रासायनिक नमूनों की शुद्धता बनाए रखना विवेचना की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रयोगशाला में प्राप्त परिणाम विश्वसनीय हों और अदालत में मान्य हों।
जैविक साक्ष्य और डीएनए प्रोफाइलिंग
जैविक साक्ष्यों जैसे रक्त, वीर्य, बाल और लार के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, चेन ऑफ कस्टडी तथा डीएनए प्रोफाइलिंग में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की भूमिका पर आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कमलेश कैथोलिया ने विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की। उन्होंने डीएनए साक्ष्य के महत्व और उसकी सटीकता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
अपराध स्थल अन्वेषण और क्राइम सीन किट का उपयोग
जिला सीन क्राइम ऑफ मोबाइल यूनिट, भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन (CSI) किट के व्यावहारिक उपयोग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों की प्राथमिकता आधारित पहचान और सुरक्षित जब्ती प्रक्रिया को समझाया। प्रतिभागियों को सिखाया गया कि कैसे घटनास्थल को दूषित होने से बचाया जाए और संकलित साक्ष्यों का सही प्रलेखन किया जाए।
बैलिस्टिक्स साक्ष्य और शंका समाधान
राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL), सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी श्री रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इस सत्र में आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों और गनशॉट रेजीड्यू (GSR) के संकलन, संरक्षण तथा एफएसएल परीक्षण की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। सत्र के अंत में प्रतिभागियों द्वारा उठाई गई व्यावहारिक शंकाओं का भी समाधान किया गया।
इस तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग श्री पंकज श्रीवास्तव की उपस्थिति में होगा। अंतिम दिन सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (फोटो) श्री अमिताभ तिवारी द्वारा अपराध घटना स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुतीकरण और उसके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
