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MP के श्योपुर जिले में कुपोषण का संकट गहराया

श्योपुर जिले में कुपोषण की भयावह हकीकत सरकारी दावों के विपरीत है, जहां हजारों बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं।

Sep 9
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MP के श्योपुर जिले में कुपोषण का संकट गहराया

ग्राउंड पर गंभीर स्थिति

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में कुपोषण की भयावह सच्चाई जमीनी हकीकत को दर्शाती है, जो सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है। हजारों बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं, और ऐसे कई मामले आंगनवाड़ी के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं।

बच्चों के कुपोषण की गंभीरता

हालिया रिपोर्टें श्योपुर के बच्चों की गंभीर स्थिति को उजागर करती हैं, जहां कई छोटे बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से काफी कम है। उदाहरण के लिए, ढाई साल के एक बच्चे का वजन महज 4.8 किलोग्राम पाया गया, जबकि उस उम्र के लिए मानक वजन लगभग 11.5 किलोग्राम है।

कम रिकवरी और डिस्चार्ज दरें

मुख्यमंत्री बाल स्वास्थ्य संजीवनी कोष के आंकड़ों से एक चिंताजनक प्रवृत्ति का पता चलता है: गंभीर कुपोषण से पीड़ित 50% से अधिक बच्चों को पूरी तरह ठीक हुए बिना ही सिस्टम से डिस्चार्ज किया जा रहा है। इससे रिकवरी दरों में भारी गिरावट आई है।

संसाधन और बजट की कमी

एनडीटीवी एमपी छत्तीसगढ़ की रिपोर्टों के अनुसार, पौष्टिक भोजन के लिए आवंटित बजट और प्रबंधन अपर्याप्त साबित हो रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRCs) और आंगनवाड़ियों के कामकाज पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

कुपोषण के मूल कारण

क्षेत्र में कुपोषण के बढ़ते संकट का मुख्य कारण अत्यधिक गरीबी, आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी और प्रशासनिक जवाबदेही का अभाव है। इन आपस में जुड़े कारकों से कुपोषण से लड़ने के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल बनता है।

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