MP में दो बड़े बैंक फ्रॉड मामलों पर ED की कार्रवाई तेज: सेhore के 2.08 करोड़ के संपत्ति अटैच, AOPL केस में 111 करोड़ की भी कुर्की
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भोपाल इकाई ने मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल मिलाकर 113 करोड़ रुपए...

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भोपाल इकाई ने मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग बैंक धोखाधड़ी मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल मिलाकर 113 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियाँ कुर्क की हैं। इनमें से एक मामला सीहोर जिले के आष्टा में सरकारी स्व-रोजगार योजनाओं के नाम पर किए गए बैंक लोन घोटाले से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला बहु-राज्यीय व्यापारी समूह M/s Advantage Overseas Pvt. Ltd. (AOPL) द्वारा किए गए कथित अंतरराष्ट्रीय व्यापारी लेन-देन घोटाले से संबंधित है।
आष्टा लोन फ्रॉड केस: 2.08 करोड़ की संपत्ति अटैच
ED ने प्रधान आरोपी मनोज परमार और उसके सहयोगियों की 12 अचल संपत्तियाँ, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹2.08 करोड़ है, कुर्क की हैं। कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।
यह मामला 2016–17 में सरकारी योजनाओं—प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (CMYUY)—के नाम पर किए गए बड़े बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है।
कैसे हुआ घोटाला?
CBI के FIR और चार्जशीट पर आधारित ED की जांच में सामने आया:
-
मनोज परमार ने तत्कालीन पंजाब नेशनल बैंक, आष्टा शाखा प्रबंधक मार्क पियस करारी के साथ मिलकर
-
18 फर्जी लोन स्वीकृत करवाए
-
जिनकी कुल राशि थी ₹6.20 करोड़ (₹6.01 करोड़ वास्तविक रूप से वितरित हुए)
-
इन लोन के लिए फर्जी आवेदक, नकली दस्तावेज़, बनावटी कोटेशन और गलत प्रोजेक्ट रिपोर्ट का इस्तेमाल किया गया।
ED रेड के बाद मनोज परमार और पत्नी की मौत
इस घोटाले में दिसंबर 2024 में ED की छापेमारी के बाद एक दर्दनाक मोड़ आया था।
-
मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा मृत पाए गए थे।
-
दोनों के शव लगभग आठ दिन बाद उनके दफ्तर में मिले।
-
मौत का संबंध छापे के तुरंत बाद की परिस्थितियों से जोड़ा गया, हालांकि आधिकारिक जांच अलग से जारी है।
दूसरा बड़ा केस: AOPL पर 111.32 करोड़ की संपत्ति कुर्क
ED ने दूसरी बड़ी कार्रवाई में AOPL (Advantage Overseas Pvt. Ltd.), उसके निदेशकों, गारंटरों और लाभार्थियों की मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और केरल स्थित संपत्तियाँ कुर्क कर लीं। इनकी कुल कीमत ₹111.32 करोड़ है।
इसमें प्रमुख नाम है—
श्रिकांत भसी,
जो कंपनी के प्रमोटर और प्रमुख लाभकारी मालिक (Significant Beneficial Owner) बताए गए हैं।
AOPL की धोखाधड़ी कैसे हुई?
ED की जांच में पता चला कि कंपनी ने—
-
फ़र्जी व्यापारी लेन-देन,
-
सर्कुलर ट्रेडिंग,
-
जाली दस्तावेज़,
-
और बैंक फंड्स को डायवर्ट करने जैसी गतिविधियों में शामिल होकर
SBI शाहपुरा शाखा को ₹1,266.63 करोड़ का नुकसान पहुँचाया।
जांच में यह भी सामने आया कि AMG Group और संबंधित कंपनियों में कई इकाइयाँ कर्मचारियों और रिश्तेदारों के नाम पर थीं, लेकिन उनका वास्तविक नियंत्रण श्रिकांत भसी के पास ही था।
छापों में क्या मिला?
1 अगस्त 2025 को ED ने कई स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें—
-
प्रॉपर्टी दस्तावेज़
-
समझौता पत्र
-
डिजिटल डेटा
-
आंतरिक संचार
जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए।
17 नवंबर 2025 को इसी केस में दुबई स्थित ₹51.70 करोड़ मूल्य की विदेशी संपत्तियाँ पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं।
इन नई कुर्कियों के साथ मामले में अब तक कुल ₹163.02 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच हो चुकी हैं।
क्यों महत्वपूर्ण हैं ये कार्रवाई? — व्यापक प्रभाव
-
दोनों मामले दिखाते हैं कि सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग किस स्तर तक हो सकता है।
-
PMEGP और CMYUY जैसी योजनाएँ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन फर्जी आवेदकों के नाम पर लोन लेना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
-
AOPL केस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए फर्जी लेन-देन से स्पष्ट है कि कॉर्पोरेट फ्रॉड अब बहु-स्तरीय और अत्यंत जटिल रूप ले चुका है।
-
ED की हालिया कार्रवाई सरकार के इस प्रयास का संकेत है कि बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग पर नकेल कसने का अभियान और कड़ा होगा।
