MP में विधायकों की सैलरी–पर्क्स बढ़ने की तैयारी: नए साल में 1.65 लाख मासिक वेतन, पेंशन और ट्रैवल भत्तों में भी बड़ा इज़ाफ़ा संभव
वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार मध्य प्रदेश में नए साल की शुरुआत विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। राज्य...

वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार
मध्य प्रदेश में नए साल की शुरुआत विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। राज्य सरकार ने सैलरी, पेंशन और भत्तों में व्यापक बढ़ोतरी का ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यह प्रस्ताव फिलहाल मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी के इंतज़ार में है।
जिस मसौदे पर विचार किया जा रहा है उसके मुताबिक:
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वर्तमान वेतन ₹1,10,000 से बढ़ाकर ₹1,65,000 प्रति माह किया जाएगा।
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पूर्व विधायकों की मासिक पेंशन ₹35,000 से बढ़ाकर ₹65,000।
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परिवार पेंशन ₹18,000 से बढ़ाकर ₹25,000।
यह बढ़ोतरी 2016 के बाद पहली बार प्रस्तावित है, यानी लगभग 10 साल बाद संशोधन किया जा रहा है।
कौन बना रहा है प्रस्ताव?
वेतन बढ़ोतरी पर निर्णय लेने के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में शामिल हैं—
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जगदीश देवड़ा, उपमुख्यमंत्री एवं वित्त विभाग के प्रभारी (अध्यक्ष)
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अजय विश्नोई, BJP विधायक
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सचिन यादव, कांग्रेस विधायक
समिति की 28 अक्टूबर 2025 को बैठक हुई थी। 24 नवंबर की बैठक टल गई, लेकिन सदस्यों के बीच अनौपचारिक विचार-विमर्श जारी रहा। अब प्रस्ताव मुख्यमंत्री और स्पीकर के समक्ष है।
MLA LAD (स्थानीय क्षेत्र विकास निधि) में भी बड़ी छलांग
प्रस्ताव के अनुसार:
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MLA के स्थानीय विकास निधि (LAD) को ₹3.25 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किया जाए।
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विधायक का विवेकाधीन कोष ₹75 लाख तक प्रस्तावित।
यह वृद्धि विकास कार्यों पर स्थानीय स्तर पर खर्च के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रैवल, स्वास्थ्य लाभ और अन्य पर्क्स में बढ़ोतरी
ट्रैवल एलाउंस में बदलाव
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ट्रेन में एसी–1 क्लास से यात्रा का लाभ अब MLA के साथ उनकी पत्नी/पति को भी मिलेगा।
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सालाना ₹5 लाख तक हवाई यात्रा का भत्ता।
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ट्रैवल भत्ता ₹15 प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर ₹25 प्रति किलोमीटर।
चिकित्सा बीमा
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पूर्व विधायकों और उनके जीवनसाथी के लिए ₹10,000 मासिक प्रीमियम वाली मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी।
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वार्षिक पेंशन वृद्धि ₹800 से बढ़ाकर ₹1500।
राज्य के खजाने पर कितना असर?
यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू की जाती है, तो राज्य पर सालाना लगभग ₹58.51 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, यह बिल अभी तक शीतकालीन सत्र के एजेंडा में शामिल नहीं है, लेकिन मसौदा समय पर मंज़ूर हुआ तो सत्र के अंत में इसे पेश किया जा सकता है।
इस फैसले का व्यापक असर
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राजनीतिक रूप से यह मुद्दा चर्चा में आ सकता है क्योंकि यह बढ़ोतरी उस समय प्रस्तावित है जब राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में खर्च का दबाव बढ़ रहा है।
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प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो 10 साल बाद वेतन संशोधन का तर्क भी मजबूत है, क्योंकि महंगाई और कार्यभार में बढ़ोतरी का हवाला दिया जा सकता है।
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विपक्ष और जनता के बीच यह मुद्दा पारदर्शिता, वित्तीय प्राथमिकताओं और जनकल्याण व्यय के संदर्भ में बहस को जन्म दे सकता है।
