मतदाता सूची पुनरीक्षण में MP चौथे स्थान पर; फॉर्म डिजिटलाइज़ेशन में शहरी क्षेत्रों की धीमी रफ्तार चिंता का कारण
भोपाल | विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मध्यप्रदेश मतदाता सूची के...

भोपाल | विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मध्यप्रदेश मतदाता सूची के डिजिटलीकरण में देश के 12 राज्यों में चौथे स्थान पर है। निर्वाचन आयोग (EC) के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि भले ही राज्य के 99.79% मतदाताओं को उनका एन्यूमरेशन फॉर्म (EF) मिल चुका है, लेकिन इनमें से केवल 39.84% फॉर्म ही ऑनलाइन अपलोड हो पाए हैं।
अन्य राज्यों से पीछे क्यों रह गया मध्यप्रदेश?
नवंबर 21 को दोपहर 3 बजे तक EC द्वारा जारी डिजिटलाइजेशन प्रगति रिपोर्ट के अनुसार—
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लक्षद्वीप शीर्ष पर है, जहाँ 61.30% फॉर्म डिजिटल हो चुके हैं।
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गोवा 59% और राजस्थान 54.26% फॉर्म अपलोड कर चुके हैं।
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मध्यप्रदेश इस सूची में चौथे नंबर पर है, जबकि घर-घर सर्वे अभी 4 दिसंबर तक जारी रहेगा।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्रों में फॉर्म अपलोडिंग की रफ्तार लगातार धीमी है। जोनल और वार्ड स्तर पर कई जगहों पर भरकर लौटे फॉर्मों की एंट्री समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे MP अन्य राज्यों से पिछड़ता दिख रहा है।
ड्राफ्ट रोल में नाम जुड़ने को लेकर क्या हैं नियम?
CEO कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि—
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4 दिसंबर तक BLOs को सौंपे गए फॉर्म ड्राफ्ट रोल में शामिल कर लिए जाएंगे,
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भले ही डेटा में कुछ विसंगतियाँ क्यों न हों।
लेकिन ड्राफ्ट के बाद अगर किसी मतदाता की जानकारी EC के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो उन्हें ज़रूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, अन्यथा उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
सबसे बड़ी चिंता उन नागरिकों की है जिनके फॉर्म अधिकारियों तक पहुँच ही नहीं पाते। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया—
“जो फॉर्म 4 दिसंबर तक प्राप्त नहीं होंगे, उन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में दिखाई नहीं देंगे।”
मैदान से रिपोर्ट: BLOs की अनुपस्थिति से बढ़ी मुश्किलें
फील्ड फीडबैक में सामने आया है कि कई शहरी इलाकों में—
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BLOs ने घर-घर जाकर फॉर्म देने से परहेज किया,
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इसकी जगह उन्होंने पड़ोसी, दुकानदार या सुरक्षा गार्ड के पास कई फॉर्म छोड़ दिए,
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जिसके चलते न तो समय पर फॉर्म वापस मिले, न ही उनकी डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया तेज हो पाई।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह रफ्तार जारी रही तो बड़ी संख्या में नए और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से गायब हो सकते हैं, जिससे आगामी चुनावों में चुनौतियाँ बढ़ेंगी।
मतदाताओं को क्या करना चाहिए?
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BLOs से समय पर संपर्क कर फॉर्म जमा करें।
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ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद अपनी जानकारी अवश्य सत्यापित करें।
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डेटा मेल न खाने पर आवश्यक पहचान व निवास दस्तावेज़ तैयार रखें।
यह प्रक्रिया न केवल आपका नाम सूचियों में बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि चुनावी पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करती है।
