मिशन शक्ति: फर्रुखाबाद में छात्रा बनी एक दिन की जिलाधिकारी, सुनीं समस्याएं
फर्रुखाबाद में मिशन शक्ति अभियान के तहत पायल दीक्षित नामक छात्रा एक दिन के लिए जिलाधिकारी बनीं। उन्होंने जनसुनवाई में छह फरियादियों की समस्याएं सुनीं...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 13 अक्टूबर 2026
मिशन शक्ति अभियान के तहत फर्रुखाबाद में एक अनूठी पहल के अंतर्गत, उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपरगांव की कक्षा छह की छात्रा पायल दीक्षित को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास करना और उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली से अवगत कराना है। यह आयोजन राष्ट्रव्यापी 'मिशन शक्ति' अभियान का एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना तथा उनकी सुरक्षा एवं अधिकारों को सुनिश्चित करना है। इस विशेष पहल के माध्यम से, युवा बालिकाओं को प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने और नेतृत्व के गुणों को विकसित करने का अवसर मिलता है।
इस एक दिवसीय भूमिका में, पायल दीक्षित ने जनसुनवाई के दौरान छह फरियादियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। इन शिकायतों में सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण, जमीन पर कब्जा, अतिक्रमण के कारण होने वाला जाम, छेड़खानी के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी और आवास योजना का लाभ न मिलने जैसे विभिन्न गंभीर मामले शामिल थे। प्रत्येक शिकायत को पायल ने अत्यंत गंभीरता से लिया और शिकायतकर्ताओं को धैर्यपूर्वक सुना। इसके उपरांत, छात्रा ने इन सभी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्याओं का उचित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच करें और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास
जनसुनवाई संपन्न होने के पश्चात, जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने छात्रा पायल दीक्षित को एक पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस विशेष पहल के माध्यम से बालिकाओं के भीतर आत्मविश्वास को बढ़ावा देना, उनमें नेतृत्वकारी गुणों का संवर्धन करना और उन्हें सरकारी प्रशासनिक व्यवस्था की बेहतर समझ प्रदान करना मुख्य लक्ष्य है। पायल ने अपनी भूमिका को अत्यंत कुशलता से निभाया, जो प्रशासनिक कार्यों के प्रति उनकी समझ और गंभीरता को दर्शाता है। उन्हें प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में अधिकारियों ने भी तत्परता दिखाई, जिससे यह प्रतीकात्मक प्रक्रिया एक वास्तविक समाधान की ओर अग्रसर हुई।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के आयोजन छात्राओं को समाज और शासन के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। यह उन्हें न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करता है, बल्कि उन्हें समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक तरीके सोचने के लिए भी प्रोत्साहित करता है। पायल दीक्षित ने अपनी भूमिका का निर्वहन पूरी निष्ठा और गंभीरता से किया, जिससे स्थानीय स्तर पर इस पहल की काफी चर्चा हुई। इस अनुभव ने उन्हें भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं में आने के लिए प्रेरित किया है, जिससे वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकें। यह प्रयास भविष्य में बालिकाओं को प्रशासनिक सेवाओं में आने के लिए प्रेरित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
