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मीरजापुर में हिंदी दिवस: न्यायिक कार्यों में भाषा के प्रयोग पर जोर

मीरजापुर में हिंदी दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने न्यायिक कार्यों में हिंदी के अधिक प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

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संवाददाता: शशि भूषण कंचनीय
मीरजापुर में हिंदी दिवस: न्यायिक कार्यों में भाषा के प्रयोग पर जोर

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: शशि भूषण कंचनीय

द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 14 सितंबर 2026

मीरजापुर के जिला सत्र न्यायाधीश न्यायालय परिसर में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य न्यायिक कार्यों में हिंदी भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करना और इसके प्रति सम्मान तथा गौरव की भावना को सुदृढ़ करना रहा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित था कि किस प्रकार हिंदी, जो भारत की राजभाषा है, न्यायिक प्रणाली को अधिक सुलभ और पारदर्शी बना सकती है।

समारोह में जनपद न्यायाधीश अनुपम कुमार, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय संजय कुमार शुक्ला, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल कुमार सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आनन्द कुमार-II सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी सम्मानित अधिकारियों ने हिंदी भाषा से संबंधित कविताएं, संस्मरण और अपने विचार प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी की सरलता, सहजता और जनसामान्य के साथ इसके गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे हिंदी भाषा, अपनी व्यापक पहुंच और समझ के कारण, आम नागरिकों को न्याय प्रक्रिया में अधिक आत्मविश्वास और भागीदारी का अनुभव करा सकती है।

न्याय को सुलभ बनाने में हिंदी की भूमिका

अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। न्याय के क्षेत्र में सरल एवं जनसुलभ भाषा का विशेष महत्व होता है। न्यायिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग न्याय को आमजन के और अधिक निकट लाने में सहायक सिद्ध हो सकता है। यह केवल एक भाषाई परिवर्तन नहीं है, बल्कि न्यायपालिका और जनता के बीच एक मजबूत सेतु के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जनपद न्यायाधीश अनुपम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जब न्याय की भाषा आम नागरिक की भाषा होती है, तो न्याय प्राप्त करना उसके लिए कम भयभीत करने वाला और अधिक स्वाभाविक हो जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हिंदी का प्रयोग न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों के बीच संवाद को सहज बनाएगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गति और सटीकता में वृद्धि होगी। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय संजय कुमार शुक्ला ने उदाहरण देकर समझाया कि किस प्रकार पारिवारिक न्यायालयों में, जहाँ भावनात्मक मुद्दे अधिक होते हैं, हिंदी की कोमलता और अपनेपन का एहसास वादियों को अपनी बात खुलकर कहने में मदद करता है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल कुमार सिंह ने बताया कि विभिन्न न्यायालयों में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों का हिंदी में अनुवाद और उपयोग, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए, जानकारी तक पहुँच को आसान बनाता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है कि न्याय का अधिकार केवल भाषा की बाधा के कारण किसी से छिन न जाए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आनन्द कुमार-II ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विधिक सहायता प्राप्त करने वाले अधिकांश लोग हिंदी भाषी होते हैं, और इसलिए विधिक सलाह तथा सेवाओं का हिंदी में प्रावधान उनकी मदद के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इस कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए विचारों से न्यायालय परिसर में सौहार्द और जीवंतता का वातावरण बना रहा। पूरे आयोजन का सफल संचालन सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी अभिषेक सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित न्यायिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि न्यायिक कार्यों में हिंदी को उसका उचित स्थान दिलाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इस कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में हिंदी का प्रयोग न केवल भाषाई गौरव को बढ़ाता है, बल्कि यह न्याय प्रणाली को आम आदमी के लिए अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उपस्थित न्यायिक अधिकारियों ने भविष्य में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया, जिससे न्याय को वास्तव में प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाया जा सके।