मीरजापुर जेल में टीबी की जांच, बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाओं की दी गई जानकारी
मीरजापुर जिला कारागार में एक बंदी में टीबी के संभावित लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। टीम ने बलगम का...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: शशि भूषण कंचनीय
द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 14 सितंबर 2026
मीरजापुर जिला कारागार में एक बंदी में क्षय रोग (टीबी) के संभावित लक्षण पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने शुक्रवार को कारागार का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रोग की पुष्टि के लिए आवश्यक जांच करना और जेल में निरुद्ध अन्य बंदियों को टीबी व उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करना था।
क्षय रोग विभाग के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर सतीश शंकर यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने संदिग्ध बंदी के बलगम का नमूना एकत्र किया। इस नमूने को आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि टीबी रोग की स्थिति का स्पष्ट पता चल सके। इस प्रकार की सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि कारागार जैसे सीमित वातावरण में भी संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान और रोकथाम की जा सके, जिससे न केवल बंदियों के स्वास्थ्य की रक्षा होती है, बल्कि पूरे समुदाय में संक्रमण फैलने का जोखिम भी कम होता है।
जेल के भीतर स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर जोर
इस अभियान के दौरान, सतीश यादव ने जेल में पहले से टीबी का इलाज करा रहे दो अन्य बंदियों से भी मुलाकात की। उन्होंने उनके स्वास्थ्य की स्थिति, खान-पान और दवाओं की उपलब्धता की गहन समीक्षा की। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि वे उचित उपचार प्राप्त कर रहे हैं और उनकी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं। इसके अतिरिक्त, टीम ने जेल में मौजूद सभी बंदियों को टीबी के विभिन्न लक्षणों, इसके प्रसार के तरीकों और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही नि:शुल्क चिकित्सा एवं उपचार सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी एक इलाज योग्य बीमारी है और प्रारंभिक निदान व पूर्ण उपचार महत्वपूर्ण है। बंदियों को यह भी समझाया गया कि यदि उनमें खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तत्काल जेल अस्पताल में सूचित करना चाहिए। प्रशासन द्वारा जेल के भीतर स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते नियंत्रित करना और बंदियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इस अभियान को सफल बनाने में जेल अधीक्षक आर के मिश्रा, जेल चिकित्सक डॉक्टर प्रदीप कुमार, एक्स-रे टेक्निशियन श्यामनाथ और जेल राइटर जगपाल ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके सहयोग से ही यह सुनिश्चित किया जा सका कि टीम अपना कार्य सुचारू रूप से कर सके और बंदियों तक आवश्यक जानकारी पहुंच सके। क्षय विभाग की ओर से टीबीएचबी अवध बिहारी कुशवाहा और अंशुमान द्विवेदी ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावी ढंग से संपन्न हुई। ऐसे संयुक्त प्रयास जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की महत्ता को रेखांकित करते हैं, विशेषकर सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर।
