मतदाता सूची सत्यापन: पूर्व राजदूत के अनुभव ने उठाई आम नागरिक की चिंता
पूर्व राजदूत नवदीप सूरी को मतदाता सूची सत्यापन के दौरान अपनी नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने से SIR प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | लुधियाना | 24 अगस्त 2026
पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और तीन देशों में भारत के राजदूत रह चुके नवदीप सूरी ने पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान उनके मौजूदा दस्तावेजों का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न होने पर उनसे अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। श्री सूरी ने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए चिंता व्यक्त की है कि यदि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके एक पूर्व राजनयिक को भी अपनी नागरिकता साबित करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो आम और गरीब नागरिकों की स्थिति क्या होगी।
नवदीप सूरी के अनुसार, उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत अपना वोटर आईडी और आधार कार्ड संबंधित अधिकारी के पास जमा कराया था। शुरुआती स्तर पर उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेज और विवरण ठीक हैं। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके कुछ विवरण वर्ष 2003 में इस्तेमाल की जा रही पुरानी मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहे हैं। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी कर अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
पूर्व राजनयिक ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2003 में वह भारत में उपस्थित नहीं थे, बल्कि लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात थे। इसी कारण पुराने मतदाता रिकॉर्ड से उनके विवरण का मिलान नहीं हो सका। जब उनसे नागरिकता संबंधी प्रमाण मांगा गया, तो उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पासपोर्ट सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही।
आम नागरिकों की परेशानी पर चिंता
श्री सूरी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके पास पहचान और नागरिकता से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन देश के आम नागरिकों के पास ऐसे सभी दस्तावेज होना आवश्यक नहीं है। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की कि यदि एक पूर्व राजदूत को भी इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो उन गरीब और सामान्य नागरिकों को कितनी परेशानी हो सकती है, जिनके पास पुराने रिकॉर्ड या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
पूर्व राजनयिक के इस अनुभव ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दस्तावेजों की स्वीकार्यता और आम नागरिकों के लिए इसे सरल बनाए जाने की आवश्यकता पर व्यापक बहस छेड़ दी है। यह सवाल उठता है कि ऐसे समय में जब तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड का प्रचलन बढ़ रहा है, तब भी पुराने, अप्राप्य या खोए हुए दस्तावेजों के आधार पर नागरिकों को अपनी पहचान और नागरिकता को बार-बार साबित करने की प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ रहा है।
सूरी का राजनयिक करियर
नवदीप सूरी भारतीय विदेश सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने विस्तृत राजनयिक कार्यकाल के दौरान संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र में भारत के राजदूत के रूप में तथा ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने विभिन्न देशों में भारत के राजनयिक मिशनों में अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है, जिससे देश का प्रतिनिधित्व किया है।
ऐसे में, मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान उनके रिकॉर्ड का पुराने दस्तावेजों से मेल नहीं खाने और अतिरिक्त प्रमाण मांगे जाने की घटना ने SIR प्रक्रिया की व्यावहारिकता और संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यह मामला विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए चिंता का विषय है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं या जिनके पास ऐतिहासिक रूप से सरकारी दस्तावेजों को सहेज कर रखने की व्यवस्था नहीं रही है।
निर्वाचन अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि श्री सूरी का नाम मतदाता सूची से हटाया नहीं गया है। उनका नाम मौजूदा मसौदा मतदाता सूची में शामिल है और उनका मतदाता पंजीकरण अमृतसर में दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार, चूंकि उनके वर्तमान विवरण का पुराने रिकॉर्ड से तत्काल मिलान नहीं हो सका, इसलिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी कर उनसे दस्तावेज मांगे गए थे।
अधिकारियों ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह का नोटिस किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम निर्णय नहीं होता है। यह पुराने मतदाता रिकॉर्ड से वर्तमान विवरण का मिलान न होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली एक सामान्य सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद रिकॉर्ड की आगे की जांच की जाएगी। निर्वाचन आयोग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम ही शामिल हों, साथ ही किसी भी पात्र नागरिक को अनावश्यक रूप से सूची से बाहर न किया जाए।
हालांकि, श्री सूरी द्वारा उठाए गए बिंदुओं ने SIR प्रक्रिया के निष्पादन के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया है। यह आवश्यक है कि ऐसी प्रक्रियाएं न केवल निष्पक्ष हों, बल्कि नागरिकों के लिए सुगम और मानवीय भी हों, ताकि किसी भी व्यक्ति को, विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों को, अपनी नागरिकता साबित करने में अत्यधिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इस घटना के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-अनुकूल बनाने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है।
