मानवाधिकारों के लिए मध्यप्रदेश पुलिस को संयुक्त राष्ट्र में मिला 'हीरो अवार्ड'
मध्यप्रदेश पुलिस को मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र में 'हीरो अवार्ड' मिला। डीआईजी डॉ. विनीत कपूर को सम्मानित किया गया, जबकि 'नशे से दूरी है ज़रूरी' अभियान की भी सराहना हुई।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 3 अगस्त 2026
मध्यप्रदेश पुलिस को मानवाधिकार आधारित और जन-केंद्रित पुलिसिंग के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहचान मिली है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के नेतृत्व में राज्य पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों को संयुक्त राष्ट्र (United Nations) मुख्यालय में आयोजित विश्व मानवाधिकार शिखर सम्मेलन में सराहा गया। इस सम्मेलन में डीआईजी (कम्युनिटी पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर को 'Human Rights Hero Award' से सम्मानित किया गया, जो प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है।
विश्व के 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, पुलिस अधिकारियों, शिक्षाविदों और मानवाधिकार विशेषज्ञों के समक्ष डॉ. विनीत कपूर ने मध्यप्रदेश पुलिस की मानवाधिकार-आधारित प्रशिक्षण प्रणाली और सामुदायिक पुलिसिंग के अभिनव मॉडलों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान की मूल भावना और मानवाधिकारों के सार्वभौमिक सिद्धांतों को पुलिस प्रशिक्षण और कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाया गया है। संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को प्रभावी कानून-व्यवस्था, सुशासन और जन-विश्वास का आधार बताते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला।
सामुदायिक पुलिसिंग की अभिनव पहलों को वैश्विक मंच पर पहचान
डॉ. कपूर ने मध्यप्रदेश पुलिस की कुछ प्रमुख सामुदायिक पुलिसिंग पहलों जैसे महिला हेल्प डेस्क, शक्ति समितियों और प्रोजेक्ट सृजन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन पहलों के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित की गई है। लैंगिक हिंसा और बाल संरक्षण के मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप तथा समुदाय आधारित पुलिसिंग को नई दिशा देने में इन पहलों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इन प्रयासों को सतत विकास लक्ष्य (SDG-16) के अनुरूप एक प्रभावी, समावेशी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
इन पहलों के माध्यम से, मध्यप्रदेश पुलिस ने समाज के उन उपेक्षित वर्गों तक पहुँचने का प्रयास किया है जिन्हें अक्सर न्याय प्रणाली से दूर समझा जाता है। महिला हेल्प डेस्क विशेष रूप से महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने और पीड़ितों को सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शक्ति समितियाँ स्थानीय स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक मंच प्रदान करती हैं, जहाँ वे अपनी समस्याओं को खुलकर व्यक्त कर सकती हैं और समाधान पा सकती हैं। इसी तरह, प्रोजेक्ट सृजन जैसे नवाचार समाज के वंचित तबकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं, जो इसे एक समग्र और समावेशी दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश पुलिस की मानवाधिकार उन्मुख प्रशिक्षण प्रणाली, क्षमता निर्माण, सामुदायिक सहभागिता और पीपल-सेंट्रिक पुलिसिंग की व्यापक प्रशंसा की। इन पहलों को आधुनिक लोकतांत्रिक पुलिसिंग का एक प्रभावी उदाहरण मानते हुए इन्हें वैश्विक स्तर पर साझा किए जाने योग्य मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया। उन्होंने माना कि यह मॉडल अन्य देशों की पुलिसिंग व्यवस्थाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
'नशे से दूरी है ज़रूरी' अभियान को मिली सराहना
डॉ. कपूर ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान 'नशे से दूरी है ज़रूरी' का भी संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उपस्थित प्रतिनिधियों के समक्ष उल्लेख किया। उन्होंने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से नशामुक्ति का संदेश देने का आग्रह किया। इस पर अनेक देशों के प्रतिनिधियों और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 'Say No to Drugs' का संदेश देते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे इस जनजागरूकता अभियान की सराहना की और इसे समाजहित में एक अनुकरणीय पहल बताया।
यह अभियान न केवल नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाता है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रहने और सकारात्मक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित भी करता है। संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर इस अभियान को मिली सराहना, नशे के खिलाफ लड़ाई में मध्यप्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि नशीली दवाओं का सेवन समाज के लिए एक गंभीर खतरा है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है। मध्यप्रदेश पुलिस का यह प्रयास एक महत्वपूर्ण कदम है जो इस वैश्विक समस्या के समाधान में योगदान दे सकता है।
मानवाधिकार शिक्षा, पुलिस प्रशिक्षण और समुदाय आधारित जागरूकता के क्षेत्र में डीआईजी डॉ. विनीत कपूर के उल्लेखनीय और दीर्घकालिक योगदान को देखते हुए उन्हें 'Human Rights Hero Award' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण, दूरदर्शी नेतृत्व और नवाचारों का प्रतीक है, बल्कि यह मध्यप्रदेश पुलिस की मानवीय, संवेदनशील और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता को भी दर्शाता है।
यह सम्मान मध्यप्रदेश पुलिस की जनकेंद्रित कार्यशैली, नवाचार और उत्कृष्ट पुलिसिंग का वैश्विक स्तर पर मिला महत्वपूर्ण प्रमाण है। मानवाधिकार संरक्षण, सामुदायिक पुलिसिंग, जनसहभागिता और पुलिस क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए गए कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि इस बात की भी पुष्टि करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस आधुनिक, संवेदनशील और नागरिकों के प्रति उत्तरदायी पुलिसिंग के अपने उद्देश्य को प्रभावी ढंग से साकार कर रही है। यह पुरस्कार इस बात का भी द्योतक है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के नैतिक और सामाजिक उत्थान में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
