BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

मानसून सत्र के पांचवें दिन भी संसद में गतिरोध, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

विपक्ष के हंगामे, नारेबाजी और विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

Few hours ago
4 मिनट में पढ़ें
मानसून सत्र के पांचवें दिन भी संसद में गतिरोध, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी विपक्षी दलों के भारी हंगामे और लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा व राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से संचालित नहीं हो सकी। विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते बार-बार व्यवधान की स्थिति बनी रही। लगातार बने इस गतिरोध को देखते हुए पीठासीन अधिकारियों ने दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

सत्र के आरंभ होते ही विपक्षी सांसद अपने-अपने मुद्दे उठाते हुए सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे। कई सदस्यों ने अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी सांसदों द्वारा विभिन्न ज्वलंत विषयों पर तत्काल चर्चा की मांग की गई। सदन की अध्यक्षता कर रहे पीठासीन अधिकारियों ने बार-बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही को नियमों के अनुसार संचालित होने देने की अपील की, किंतु हंगामा जारी रहा और उनकी अपील अनसुनी कर दी गई।

प्रश्नकाल और विधायी कार्य प्रभावित, कामकाज में बाधा

विपक्षी हंगामे के कारण लोकसभा में प्रश्नकाल बुरी तरह प्रभावित हुआ। सांसदों द्वारा पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाबों की प्रक्रिया बाधित रही, जिससे महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान रुक गया। इसके अतिरिक्त, सदन में सूचीबद्ध कई विधायी कार्यों को भी आगे बढ़ाने में कठिनाई आई। सरकार की ओर से सदन की कार्यवाही को सामान्य रूप से चलाने के प्रयास किए गए, लेकिन विपक्ष के तीव्र विरोध के कारण स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकी और कामकाज ठप्प रहा।

इसी प्रकार, राज्यसभा में भी विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सभापति की ओर से सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा बनाए रखने की बार-बार अपील की गई, परंतु विपक्षी सदस्यों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इस हंगामे ने संसद के एजेंडे को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों और प्रस्तावों पर चर्चा विलंबित हो गई है।

सत्ता पक्ष-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप, जनहित पर प्रभाव

सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है। सरकार का तर्क है कि संसद जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने और देश के लिए कानून बनाने का एक गरिमामय मंच है, परंतु लगातार हो रहे व्यवधान के कारण आवश्यक विधायी कार्य और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। सरकार के अनुसार, यह रवैया लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए हानिकारक है।

वहीं, विपक्ष ने सरकार पर जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि वे जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, वे सीधे तौर पर आम जनता के जीवन से जुड़े गंभीर विषय हैं और सरकार को उन पर पारदर्शी तरीके से चर्चा कर जवाब देना चाहिए। विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का प्रयास कर रही है, जिसके कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन जारी रखना पड़ रहा है। यह आरोप-प्रत्यारोप संसद के भीतर चर्चा और संवाद के माहौल को विषाक्त कर रहा है।

सत्र में निरंतर गतिरोध, सोमवार की कार्यवाही पर निगाहें

मानसून सत्र के दौरान संसद में लगातार हंगामे की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर मतभेदों के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। इसके परिणामस्वरूप, कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और जनहित से जुड़े विषयों पर आवश्यक चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी है। संसदीय कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, परंतु अभी तक यह गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

लगातार हंगामे के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी प्रकार की सहमति बनाकर सदन को सुचारु रूप से चलाया जा सकेगा, या फिर यह विरोध और गतिरोध का दौर आगे भी जारी रहेगा। संसद का कामकाज प्रभावित होने से राष्ट्रीय महत्व के निर्णयों में देरी की आशंका बनी हुई है।