मानसून सत्र: गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष, हंगामे के बाद लोकसभा-राज्यसभा स्थगित
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार को भी हंगामेदार रही। विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 27 जुलाई 2026
संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह सोमवार को भी भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न ज्वलंत मुद्दों, विशेषकर दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर आक्रामक हो गए। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और इस्तीफे की मांग की, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्षी दलों का मुख्य निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे। उनका आरोप है कि दिल्ली में छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय सीधे तौर पर जवाबदेह है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार को इस संवेदनशील मामले पर संसद में एक विस्तृत बयान देना चाहिए। इसके साथ ही, विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया।
विपक्ष के प्रमुख मुद्दे और मांगें
संसद में विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग उठाई, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। इन प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों पर हुई पुलिस कार्रवाई और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
- NEET परीक्षा पेपर लीक प्रकरण और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं की जांच।
- बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा।
- किसानों की समस्याओं, बढ़ती महंगाई, और व्यापक बेरोजगारी जैसे जनहित के मुद्दों पर बहस।
इन मांगों को लेकर विपक्षी सांसदों द्वारा की गई नारेबाजी ने प्रश्नकाल को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया।
पीठासीन अधिकारियों की अपील और सरकार का रुख
लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने विपक्षी सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और संसदीय नियमों के तहत चर्चा में भाग लेने की अपील की। पीठासीन अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में संवाद और बहस ही समस्याओं के समाधान का सर्वोत्तम माध्यम हैं और लगातार व्यवधान से संसद का कीमती समय नष्ट होता है। इन अपीलों के बावजूद हंगामा जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
दूसरी ओर, सरकार ने कहा है कि वह सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसदीय नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है। सरकार का मानना है कि विपक्ष को हंगामे के बजाय सदन की कार्यवाही में सहयोग करना चाहिए। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि संसद को बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाना सभी दलों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
आगे की रणनीति पर सबकी नजर
दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर भी विपक्ष के तेवर नरम पड़ने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में, मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के और तेज होने की प्रबल संभावना है। विपक्ष अपनी जवाबदेही और इस्तीफों की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार सदन में सामान्य कामकाज और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। यह गतिरोध सत्र के आगे के संचालन को प्रभावित कर सकता है।
